मैदान पर गोल नहीं, एक जिंदगी जीत ली! इस्तांबुल का कप्तान ने CPR देकर बचाई मासूम पक्षी की जान

डेस्क। न्यूजस्टिच
खेल के मैदान अक्सर जीत-हार, रिकॉर्ड और जोश के लिए जाने जाते हैं। लेकिन तुर्की (Turkey) की सरजमीं पर एक ऐसा मैच खेला गया, जहां ट्रॉफी से बड़ा एक जीवन था। इस्तांबुल की एक टीम के कप्तान गनी कैटन (Gani Çetin) ने फुटबॉल के मैदान पर वह कर दिखाया, जिसने दुनिया भर के करोड़ों लोगों की आंखों को नम कर दिया है।

जब थम गई एक नन्हीं जान की धड़कन
एक फ्रेंडली फुटबॉल मैच के दौरान खेल पूरे शबाब पर था। तभी अचानक एक तेज़ रफ्तार फुटबॉल हवा में उड़ रही एक मासूम चिड़िया को जा लगी। चोट इतनी गहरी थी कि वह नन्ही जान पल भर में बेजान होकर मैदान पर गिर पड़ी। स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों की सांसें थम गईं। जिस खिलाड़ी के शॉट से यह हादसा हुआ, उसके चेहरे पर गोल की खुशी नहीं, बल्कि एक मासूम की जान जाने का पछतावा साफ दिख रहा था।

खिलाड़ी बना ‘जीवनदाता’: कांपते हाथों से दिया CPR
गनी कैटन ने एक पल की भी देरी नहीं की। वह दौड़कर उस पक्षी के पास पहुंचे। उन्होंने उसे अपने हाथों के प्याले में समेटा और उसके नन्हे से सीने को अपनी उंगलियों से सहलाने लगे। वह उसे CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) दे रहे थे। उस वक्त गनी के हाथ कांप रहे थे और उनकी आँखों में सिर्फ एक ही प्रार्थना थी बस इसकी जान बच जाए।

मैदान पर सन्नाटा था, हर कोई उस नन्ही जान के फिर से चहकने का इंतजार कर रहा था। कुछ ही सेकंड बाद चमत्कार हुआ; पक्षी ने अपनी आंखें खोलीं और पंख फड़फड़ाए। उस एक पल में पूरा स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। गनी ने उस दिन कोई गोल तो नहीं किया, लेकिन एक अनमोल जिंदगी बचाकर मानवता का सबसे बड़ा मैच जीत लिया।

अखिलेश यादव ने साझा किया भावुक संदेश
इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होते ही उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसे साझा करते हुए एक बेहद भावुक नोट लिखा। उन्होंने कहा कि सोचिए, एक फुटबॉल मैदान में हजारों लोगों के बीच अचानक एक मासूम पक्षी गिर पड़ा। गोल की चाह में शॉट मारने वाले खिलाड़ी ने जब देखा कि उसकी गेंद ने एक जान ले ली है, तो वह पल भर में हीरो बन गया। उस नन्हीं जान ने जब आंखें खोलीं, तो लगा जैसे पूरा स्टेडियम फिर से जी उठा। यह घटना हमें याद दिलाती है कि खेल सिर्फ प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और करुणा का नाम भी है। गनी कैटन का यह निस्वार्थ प्रयास आज हर उस इंसान के लिए प्रेरणा है जो ‘दया’ और ‘जीव रक्षा’ में विश्वास रखता है।

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