russia locks nuclear missiles on usa tensions rise iran israel war stance

रूस ने अमेरिका पर लॉक की न्यूक्लियर मिसाइलें, परमाणु तबाही की आहट? पुतिन की बड़ी चेतावनी

दुनिया इस वक्त मानव इतिहास के सबसे खतरनाक मोड़ पर खड़ी है। ईरान पर इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमले (ऑपरेशन एपिक फ्यूरी) के बाद रूस ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने वैश्विक महाशक्तियों के बीच ‘परमाणु युद्ध’ का खतरा पैदा कर दिया है। रूसी राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया हेडल पर इससे जुड़ा पोस्ट भी किया है। जिसमें उन्होंने लिखा है कि रूस ने अपने रणनीतिक परमाणु मिसाइल सिस्टम (Nuclear Missile Systems) को सीधे तौर पर अमेरिका के प्रमुख शहरों की ओर लॉक कर दिया है।

ईरान पर हुए हमलों के बाद रूसी विदेश मंत्रालय और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सख्त रुख अपनाया है। रूस ने इस कार्रवाई पर निम्नलिखित आपत्तियां दर्ज की हैं:
• बिना उकसावे के हमला: रूस ने इसे एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र (ईरान) के खिलाफ ‘बिना उकसावे वाली सैन्य आक्रामकता’ करार दिया है।
• बातचीत में धोखा: रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि अमेरिका ने एक तरफ परमाणु बातचीत का ढोंग रचा और दूसरी तरफ ईरान के सुप्रीम लीडर के घर को निशाना बनाया, जो कूटनीति के साथ विश्वासघात है।
• रेडिएशन का खतरा: रूस ने चेतावनी दी है कि ईरान के परमाणु केंद्रों के पास किए गए ये हमले ‘रेडियोलॉजिकल आपदा’ को जन्म दे सकते हैं, जिसका असर रूस की सीमाओं तक पहुँच सकता है।

रूस और ईरान के बीच 20 साल की रणनीतिक साझेदारी का समझौता है। रूस का रुख स्पष्ट है:

  1. ईरान का समर्थन: रूस ने साफ कर दिया है कि वह अपने सहयोगी ईरान को टूटने नहीं देगा।
  2. अमेरिका को चेतावनी: मिसाइलों को लॉक करना अमेरिका के लिए सीधा संदेश है कि अगर युद्ध और बढ़ा, तो रूस चुपचाप तमाशा नहीं देखेगा।
  3. UNSC में विरोध: रूस और चीन ने इस हमले के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आपातकालीन सत्र बुलाकर अमेरिका और इजरायल पर प्रतिबंधों की मांग की है।

जैसे-जैसे तनाव बढ़ रहा है, पूरी दुनिया सांसें थामकर देख रही है। सोशल मीडिया पर #PrayForPeace और #NoWar ट्रेंड कर रहा है। परमाणु विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और अमेरिका के बीच 1962 के ‘क्यूबन मिसाइल संकट’ के बाद यह सबसे डरावना दौर है। रूस की इस हरकत के बाद व्हाइट हाउस ने भी अपनी सुरक्षा व्यवस्था को ‘हाई अलर्ट’ पर डाल दिया है। क्या कूटनीति के रास्ते अब भी खुले हैं या दुनिया एक ऐसी आग की ओर बढ़ रही है जिसे बुझाना नामुमकिन होगा?

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *