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खामेनेई की मौत पर उबला शिया समुदाय, लाल चौक पर प्रदर्शन, ईरान में 40 दिन का शोक

इजरायल और अमेरिका के साझा हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि होने के बाद भारत में शिया मुस्लिम समुदाय के बीच भारी आक्रोश देखा जा रहा है। जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के ऐतिहासिक लाल चौक पर रविवार सुबह सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने इकट्ठा होकर इस ‘हत्या’ के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया।

श्रीनगर के लाल चौक और आसपास के शिया बहुल इलाकों से आए लोगों ने हाथों में खामेनेई की तस्वीरें और काले झंडे लेकर मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजरायल को इस हमले का जिम्मेदार ठहराते हुए “डेथ टू अमेरिका” (Death to America) और “डेथ टू इजरायल” के नारे लगाए। लाल चौक पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, फिर भी लोगों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है।

खामेनेई की मौत की खबर के बाद केवल श्रीनगर ही नहीं, बल्कि भारत के अन्य हिस्सों में भी विरोध की लहर देखी जा रही है:

  1. बडगाम (कश्मीर): मध्य कश्मीर के बडगाम जिले में सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन देखा गया। यहाँ हजारों की संख्या में शिया मुसलमान सड़कों पर उतरे और इमामबाड़ा से मुख्य चौक तक रैली निकाली।
  2. करगिल (लद्दाख): लद्दाख के करगिल में भी स्थिति तनावपूर्ण है। यहाँ ‘अंजुमन-ए-जमीयतुल उलमा’ के आह्वान पर हजारों लोगों ने विरोध मार्च निकाला और हमलों की निंदा की।
  3. दिल्ली और लखनऊ: राजधानी दिल्ली के ओखला (जामिया) और लखनऊ के पुराने इलाकों में भी शिया धर्मगुरुओं ने शोक सभाएं आयोजित की हैं और अमेरिका व इजरायल के पुतले फूंकने की खबरें आई हैं।
  4. उत्तर प्रदेश के अन्य जिले: अमरोहा, जौनपुर और सहारनपुर के शिया बहुल क्षेत्रों में भी लोग सड़कों पर उतरकर अपना विरोध जता रहे हैं।

ईरानी सरकारी मीडिया (IRNA) ने पुष्टि की है कि खामेनेई के साथ उनके परिवार के कई सदस्य भी हमले में मारे गए हैं। ईरान ने देश में 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। इस बीच, भारत के कई शिया संगठनों ने भी इस ‘शहादत’ के सम्मान में कार्यक्रमों और शोक सभाओं का आयोजन किया है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि खामेनेई केवल ईरान के नेता नहीं थे, बल्कि दुनिया भर के मजलूमों (पीड़ितों) की आवाज थे। उनकी मौत ने मिडिल ईस्ट ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर धार्मिक और राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।

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