डेस्क | न्यूजस्टिच
इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ ने ईरानी सत्ता और सैन्य तंत्र की कमर तोड़ दी है। ईरानी न्यायपालिका (Judiciary) और सरकारी मीडिया ने रविवार को पुष्टि की है कि शनिवार को हुए हमलों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रमुख मेजर जनरल मोहम्मद पाकपुर और सर्वोच्च नेता के वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकार अली शमखानी ‘शहीद’ हो गए हैं।
कैसे हुआ हमला?
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हमला उस वक्त हुआ जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई अपने शीर्ष सैन्य और सुरक्षा सलाहकारों के साथ एक गुप्त बैठक कर रहे थे। इजरायली खुफिया तंत्र ने इस बैठक की सटीक लोकेशन ट्रैक की और पिनपॉइंट एयरस्ट्राइक के जरिए पूरे परिसर को मलबे में तब्दील कर दिया।
इन शीर्ष सैन्य अधिकारियों की मौत की पुष्टि:
इजरायली वायुसेना और स्वतंत्र सूत्रों के मुताबिक, इस हमले में ईरान के 7 से अधिक शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मारे गए हैं:
- मोहम्मद पाकपुर: IRGC (रिवोल्यूशनरी गार्ड्स) के मुख्य कमांडर।
- अली शमखानी: राष्ट्रीय रक्षा परिषद के प्रमुख और खामेनेई के सबसे करीबी सलाहकार।
- अजीज नासिरजादेह: ईरान के रक्षा मंत्री (पूर्व वायुसेना प्रमुख)।
- मोहम्मद शिराजी: 1989 से खामेनेई के सैन्य ब्यूरो के प्रमुख।
- सालेह असदी: सैन्य आपातकालीन मुख्यालय के खुफिया प्रमुख।
तबाही का आंकड़ा: 200 से ज्यादा मौतें
ईरानी रेड क्रीसेंट (Red Crescent) और सरकारी टेलीविजन के अनुसार, हमलों में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है:
- कुल मौतें: अब तक 201 से अधिक लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है।
- घायल: 747 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है।
- नागरिक हताहत: दक्षिण ईरान के मीनाब में एक स्कूल पर हुए हमले में 85 से 100 बच्चों की मौत की खबर ने दुनिया को झकझोर दिया है।
- परिवार की क्षति: हमलों में खामेनेई की बेटी, दामाद और पोती के भी मारे जाने की खबर है।
ईरान में 40 दिनों का शोक
सर्वोच्च नेता और शीर्ष सैन्य कमांडरों की मौत के बाद ईरान सरकार ने देश में 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक और एक हफ्ते की सार्वजनिक छुट्टी की घोषणा की है। ईरान की कमान अब अंतरिम रूप से राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और दो अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के हाथ में है, जो सत्ता के हस्तांतरण और जवाबी कार्रवाई की योजना बना रहे हैं।
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में शीर्ष अधिकारियों की मौत से ईरान का ‘कमांड एंड कंट्रोल’ सिस्टम पूरी तरह चरमरा गया है।

