पटना। न्यूजस्टिच
बिहार में राज्यसभा की खाली हो रही सीटों के लिए भाजपा ने अपने ट्रम्प कार्ड के रूप में शिवेश कुमार राम के नाम का ऐलान किया है। भाजपा के प्रदेश महामंत्री शिवेश राम को उच्च सदन भेजने के फैसले ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह केवल एक पूर्व केंद्रीय मंत्री के बेटे को मिलने वाला पॉलिटिकल रिवॉर्ड है या इसके पीछे कोई गहरा चुनावी गणित छिपा है?
कौन हैं शिवेश कुमार राम?
शिवेश कुमार राम बिहार भाजपा के एक समर्पित और जमीनी नेता माने जाते हैं। उनके पास सांगठनिक अनुभव की एक लंबी फेहरिस्त है। वे पार्टी के प्रदेश सचिव और उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। उनकी सबसे बड़ी पहचान यह है कि वे पूर्व केंद्रीय मंत्री और कद्दावर दलित नेता मुन्नी लाल के पुत्र हैं। मुन्नी लाल की विरासत और शिवेश की अपनी मेहनत ने उन्हें भाजपा के भीतर एक विश्वसनीय चेहरा बनाया है।
सासाराम की जंग और हार का हिसाब
शिवेश राम को राज्यसभा भेजने के पीछे एक बड़ा कारण उनकी हालिया चुनावी सक्रियता भी है। लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा ने उन्हें सासाराम (SC) सुरक्षित सीट से अपना उम्मीदवार बनाया था। शिवेश राम को कुल 4,93,847 वोट (45%) मिले थे। उन्हें कांग्रेस के मनोज कुमार ने हराया था। मनोज कुमार को 5,13,004 वोट मिले थे। हार का अंतर बेहद कम, लगभग 19,157 वोटों का था। इतने करीबी मुकाबले में हारने के बावजूद शिवेश ने जिस तरह क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाए रखी। उसने पार्टी आलाकमान को प्रभावित किया।
पॉलिटिकल एंगल, क्यों जताया भरोसा?
शिवेश राम दलित समुदाय से आते हैं। बिहार में इस समुदाय का एक बड़ा हिस्सा अब भाजपा की ओर झुक रहा है। शिवेश को राज्यसभा भेजकर भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि वह अपने समर्पित दलित नेताओं को सम्मान देती है। भले ही वे पूर्व केंद्रयी मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता मुन्नी लाल के बेटे हैं, लेकिन भाजपा ने इसे परिवारवाद के बजाय संगठनात्मक निरंतरता के रूप में पेश किया है। शिवेश ने सालों तक पार्टी के विभिन्न पदों पर रहकर अपनी योग्यता साबित की है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए भाजपा सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश कर रही है। शिवेश राम जैसे चेहरों के जरिए पार्टी दलित-पिछड़ा गठजोड़ को और मजबूत करना चाहती है।

