सैनिक की नजर, रणनीतिकार का दिमाग! लेफ्टिनेंट जनरल हसनैन बने बिहार के गवर्नर, विरोधियों के भी रहे हैं पसंदीदा

पटना। न्यूजस्टिच
बिहार के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारे में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। केंद्र सरकार ने भारतीय सेना के सबसे सम्मानित और रणनीतिक सोच रखने वाले अधिकारियों में शुमार, लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन को बिहार का नया राज्यपाल नियुक्त किया है। यह नियुक्ति इसलिए भी खास है क्योंकि जनरल हसनैन न केवल एक युद्धवीर हैं, बल्कि वे जटिल सामाजिक-सुरक्षा मुद्दों को संवेदनशीलता से सुलझाने के विशेषज्ञ भी माने जाते हैं।

श्रीनगर से पटना, एक रणनीतिकार की नई पारी
जनरल अता हसनैन का नाम भारतीय सैन्य इतिहास में स्वर्णाक्षर में दर्ज है। वे सेना की उस पीढ़ी का नेतृत्व करते हैं जिसने सीमा की रक्षा के साथ-साथ जनता के दिल जीतने (Winning Hearts and Minds) की कला को धरातल पर उतारा। कश्मीर में 15 कॉर्प्स (चिनार कॉर्प्स) के कमांडर के तौर पर उन्होंने हार्ट्स डॉक्ट्रिन का प्रतिपादन किया था। इस डॉक्ट्रिन का मूल मंत्र था—आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस, लेकिन आम जनता के लिए संवेदना और सम्मान। अब उम्मीद जताई जा रही है कि उनके इस अनुभव का लाभ बिहार जैसे बड़े और विकासशील राज्य को मिलेगा।

शिक्षा और सैन्य कौशल का अनूठा संगम
नैनीताल के प्रतिष्ठित शेरवुड कॉलेज से प्रारंभिक शिक्षा और दिल्ली यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले जनरल हसनैन की बौद्धिक क्षमता वैश्विक स्तर की है। उन्होंने लंदन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज और हवाई के एशिया-पैसिफिक सेंटर फॉर सिक्योरिटी स्टडीज से रक्षा मामलों में विशेषज्ञता हासिल की है। 1974 में गढ़वाल राइफल्स की 4th बटालियन से शुरू हुआ उनका सफर 21 कोर की कमान और सेना मुख्यालय में मिलिट्री सेक्रेटरी जैसे अहम पदों तक पहुँचा। उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM) और उत्तम युद्ध सेवा मेडल (UYSM) सहित कई शीर्ष सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

रिटायरमेंट के बाद भी राष्ट्र सेवा में सक्रिय
2013 में सेना से विदा लेने के बाद भी जनरल हसनैन चैन से नहीं बैठे। वे नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) के सदस्य के रूप में राष्ट्रीय नीतियों को दिशा देते रहे। इसके साथ ही, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर के चांसलर के तौर पर उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भी अमूल्य योगदान दिया। वे एक प्रखर वक्ता और लेखक हैं, जिनके विचार नेशनल सिक्योरिटी और जियोपॉलिटिकल मुद्दों पर सरकार के लिए अहम मार्गदर्शन का काम करते रहे हैं।

बिहार के लिए क्या है खास?
बिहार एक ऐसा राज्य है जो अपनी सीमाएं नेपाल जैसे देशों के साथ साझा करता है और जहाँ आपदा प्रबंधन (बाढ़) एक बड़ी चुनौती है। जनरल हसनैन का NDMA और मिलिट्री ऑपरेशन्स का अनुभव बिहार के आपदा प्रबंधन ढांचे को और अधिक सुदृढ़ बना सकता है। साथ ही, शिक्षा के क्षेत्र में उनकी गहरी रुचि बिहार के विश्वविद्यालयों में अनुशासन और गुणवत्ता सुधारने में मील का पत्थर साबित हो सकती है। एक दूसरी पीढ़ी के सैनिक के रूप में, जिन्होंने सियाचिन की दुर्गम चोटियों से लेकर अफ्रीका में संयुक्त राष्ट्र (UN) मिशन तक सेवा दी है, जनरल हसनैन का राजभवन में होना बिहार की गरिमा को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा।

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