ravi raj navada upsc success rank 20 inspiring story

न देख सकते हैं न लिख सकते हैं! नवादा के लाल का कमाल, UPSC में हासिल की 20वीं रैंक

मन में लक्ष्य को पूरा करने की जिद और हौसला हो, तो शारीरिक अक्षमता भी बेमानी हो जाती है। बिहार के नवादा जिले के रहने वाले रवि राज ने इसे सच कर दिखाया है। दृष्टिबाधित होने के बावजूद रवि राज ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में देश भर में 20वां स्थान प्राप्त कर एक नई इबारत लिख दी है। यह उनकी मेहनत और उनकी माँ की तपस्या का ही फल है कि आज पूरा देश उन्हें सलाम कर रहा है।

यह रवि राज की पहली सफलता नहीं है। इससे पहले 2024 में उन्होंने 182वीं रैंक हासिल की थी और वर्तमान में वे नागपुर में इंकम टैक्स कमिश्नर (IRAS) की ट्रेनिंग ले रहे हैं। ट्रेनिंग की व्यस्तता के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और पांचवें प्रयास में टॉप 20 में जगह बनाई। इससे पहले उन्होंने 69वीं बीपीएससी में भी 490वीं रैंक लाकर रेवेन्यू ऑफिसर का पद पाया था, लेकिन उनका लक्ष्य हमेशा से यूपीएससी ही था।

रवि राज खुद न पढ़ सकते हैं और न लिख सकते हैं। उनकी इस सफलता में उनकी माँ विभा देवी का योगदान किसी मिसाल से कम नहीं है। रवि का मानना है कि उनकी माँ ने थॉमस अल्वा एडिसन की माँ नैंसी मैथ्यूज जैसा उनका साथ दिया।

  • माँ की भूमिका: माँ खुद ग्रेजुएशन पास हैं। वे घरेलू काम निपटाकर रवि को घंटों पढ़कर सुनाती थीं।
  • रीडर और राइटर: रवि सुनते थे और फिर जो बोलते थे, उसे उनकी माँ लिखती थी।
  • डिजिटल साथ: जब माँ रसोई में होती थीं, तो रवि को यूट्यूब पर वीडियो चलाकर दे देती थीं ताकि उनकी पढ़ाई न रुके।

रवि की राह आसान नहीं थी। पहले प्रयास में केवल पीटी निकला, दूसरे और तीसरे में पीटी भी नहीं हुआ। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। रवि के पिता रंजन कुमार सिन्हा (किसान) बताते हैं कि रवि की माँ ने एक दोस्त और गुरु बनकर उसे पढ़ाया। दृष्टिबाधित होने के कारण रवि की दिनचर्या भी एक छोटे बच्चे जैसी थी, जिसे माँ ने बखूबी संभाला।

रवि राज की इस शानदार उपलब्धि पर नवादा के डीएम रवि प्रकाश और सांसद विवेक ठाकुर ने उन्हें बधाई दी है। डीएम ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में रवि ने जिले को गौरवान्वित किया है। सांसद ने इसे नवादा के लिए गर्व का विषय बताया।

रवि राज कहते हैं कि समाज में अक्सर दृष्टिबाधितों को सूरदास कहकर भिक्षावृत्ति की ओर धकेल दिया जाता है, लेकिन उन्हें इतिहास रचना था। उन्होंने साबित कर दिया कि यदि परिवार का साथ और खुद का अटूट विश्वास हो, तो दुनिया का सबसे कठिन एग्जाम भी पास किया जा सकता है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *