थाईलैंड के डॉन मुआंग एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाला थाई एयर एशिया की फ्लाइट से इस गांजा की बरामदगी हुई।इस मामले में चार यात्रियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।बताया जाता है कि ,कस्टम अधिकारियों को उन यात्रियों की गतिविधि पर संदेह हुआ, जिसके बाद उनके सामान की गहन जांच की गई। जांच के दौरान पांच अलग-अलग बैगों में छिपाकर रखा गया गांजा बरामद हुआ। हालांकि, गिरफ्तार तस्करों की अब तक पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।
क्या होता है हाइड्रो पॉनिक गांजा
सामान्य गांजा से अगर हाइड्रो पॉनिक गांजा की तुलना करें तो सामान्य गांजा मिट्टी में उपजाया जाता है जबकि हाइड्रो पॉनिक गांजा बिना मिट्टी के खास तकनीक के सहारे उपजाया जाता है।यह भी भांग(कैनाबिस) का ही पौधा है लेकिन यह मिट्टी के बजाय पोषक तत्वों से भरपूर पानी के घोल में उपजाया जाता है।इस प्रक्रिया को हाइड्रो पॉनिक खेती भी कहते हैं।इस तकनीक से पौधे को सीधे पोषण मिलता है ,जिससे वे तेजी से बढ़ते हैं और नतीजे में ज्यादा गुणवत्ता वाला होता है।
सामान्य गांजा और हाइड्रो पॉनिक गांजा में अंतर
जानकर बताते हैं कि सामान्य गांजा में नशीला तत्व (TCH) 03 से 04 फीसदी रहता है जबकि हाइड्रो पॉनिक गांजा में यह 30 से 40 फीसदी होता है।मतलब नशा के स्तर पर यह काफी प्रभावी और खतरनाक होता है।इसलिए इसे प्रीमियम नशा भी कहा जाता है।कीमत के स्तर पर भी तुलना करें तो सामान्य गांजा की कीमत 20 हजार रु किलो होती है जबकि हाइड्रो पॉनिक गांजा की कीमत 01 करोड़ रु प्रति किलो होती है।इसका सबसे अधिक उत्पादन थाईलैंड में होता है और भारत मे थाईलैंड से ही आता है।इसके अलावा अमेरिका,कनाडा,कोलंबिया, उरुग्वे आदि देशों में भी इसकी खेती होती है।
गांजा की तस्करी बनी है चुनौती
गया एयरपोर्ट पर हाइड्रो पॉनिक गांजा की खेप पहुचने की घटना कोई नयी नही है। इस वर्ष यह तीसरा मामला बताया जाता है।एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था तीन स्तरों पर संचालित होती है, जिसमें कस्टम विभाग, सीआईएसएफ और एयरपोर्ट अथॉरिटी शामिल हैं। इसके बावजूद बार-बार इस तरह की घटनाओं का सामने आना सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

