बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा (BPSC TRE-3.0) पेपर लीक कांड में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। EOU की विशेष छापेमारी टीम (SOG) ने इस पूरे कांड के मुख्य किरदारों में से एक और संजीव मुखिया गिरोह के बेहद सक्रिय सदस्य प्रवीण कुमार सिन्हा उर्फ डब्लू मुखिया को पटना के करबिगहिया इलाके से दबोच लिया है। प्रवीण की गिरफ्तारी इस पूरे रैकेट की कड़ियों को जोड़ने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
11 साल से संजीव मुखिया का राइट हैंड
पूछताछ के दौरान डब्लू मुखिया ने जो खुलासे किए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। आरोपी ने स्वीकार किया है कि वह वर्ष 2015-16 से ही कुख्यात संजीव मुखिया गिरोह से जुड़ा हुआ है। पिछले एक दशक से वह विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक कराने और अभ्यर्थियों को सेट करने में संजीव मुखिया का मुख्य सहयोगी रहा है।
5 स्कॉर्पियो, 30 अभ्यर्थी और कोहिनूर होटल की साजिश
जांच में यह बात सामने आई है कि BPSC TRE-3.0 परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक कराने के बाद संजीव मुखिया ने डब्लू मुखिया को एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी थी। डब्लू मुखिया ही वह व्यक्ति था जो 05-06 स्कॉर्पियो गाड़ियों में भरकर करीब 30 अभ्यर्थियों को हजारीबाग के कोहिनूर होटल लेकर गया था। वहां परीक्षा से एक दिन पहले गिरोह के अन्य सदस्यों की मदद से अभ्यर्थियों को प्रश्न-उत्तर रटवाने की पूरी योजना बनाई गई थी।
छापेमारी के दौरान भाग निकला था आरोपी
हजारीबाग के उसी होटल में जब पुलिस ने दबिश दी थी, तब डब्लू मुखिया चकमा देकर वहां से भागने में सफल रहा था। इसके बाद वह लखीसराय में शरण लेकर अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था। गिरफ्तारी के डर से वह लगातार ठिकाने बदल रहा था, लेकिन EOU की तकनीकी सर्विलांस और सटीक सूचना ने उसे करबिगहिया में घेर लिया।
अब तक 293 पर चार्जशीट, मुख्य सरगना की तलाश जारी
EOU अब तक इस मामले में संजीव मुखिया सहित 293 अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप पत्र (Charge Sheet) समर्पित कर चुकी है। डब्लू मुखिया की गिरफ्तारी के बाद अब जांच की आंच गिरोह के उन सफेदपोश मददगारों तक भी पहुँच सकती है जो परदे के पीछे से इस खेल को नियंत्रित कर रहे थे। फिलहाल, कांड के शेष फरार अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।

