बिहार बोर्ड 10वीं के नतीजों में इस बार पूर्णिया की बेटियों ने सफलता का परचम लहराया है। शहर के मशहूर उर्सुलाइन कॉन्वेंट स्कूल ने एक बार फिर अपनी शैक्षणिक गुणवत्ता को साबित करते हुए जिले के टॉप-10 में तीन मेधावी छात्राओं को जगह दिलाई है। मनीषा, अनीशा और साक्षी—ये तीन नाम आज न केवल स्कूल बल्कि पूरे जिले के लिए गर्व का विषय बन गए हैं।
किसान की बेटी मनीषा का ‘इंजीनियर’ बनने का सपना
जिले में 7वां स्थान प्राप्त करने वाली मनीषा राज (472 अंक) ने अपनी सफलता से यह साबित कर दिया कि अगर इरादे नेक हों तो गांव-खेत से निकला बच्चा भी आसमान छू सकता है। एक साधारण किसान धीरेंद्र कुमार की बड़ी बेटी मनीषा भविष्य में इंजीनियर बनना चाहती है। पटना में टॉपर वेरिफिकेशन के बाद से ही उसे विश्वास था कि उसका नाम मेरिट लिस्ट में होगा। मनीषा अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और शिक्षकों के मार्गदर्शन को देती हैं।
टोटो चालक की बेटी अनीशा का ‘UPSC’ लक्ष्य
कहते हैं संघर्ष से ही सफलता की इबारत लिखी जाती है। 8वां स्थान पाने वाली अनीशा कुमारी (471 अंक) की कहानी हर किसी को प्रेरित करती है। जनता चौक पर किराए के मकान में रहने वाले टोटो चालक करण कुमार यादव की बेटी ने बिना मां के साये के घर और पढ़ाई के बीच सामंजस्य बिठाया। अनीशा का आत्मविश्वास इतना था कि उसे जिले में पहली रैंक की उम्मीद थी। अब वह साइंस लेकर भविष्य में UPSC क्रैक कर देश सेवा करना चाहती हैं।
साक्षी प्रिया का ‘डॉक्टर’ बनने का संकल्प
उर्सुलाइन कॉन्वेंट की एक और होनहार छात्रा साक्षी प्रिया (471 अंक) ने भी जिले में 8वां स्थान हासिल किया है। कोर्ट स्टेशन के संत कबीर नगर की रहने वाली साक्षी के पिता किसान हैं और माता एक सरकारी शिक्षिका हैं। साक्षी का सपना डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना है। उन्होंने अपनी कामयाबी के लिए स्कूल के शिक्षकों और माता-पिता के प्रति आभार व्यक्त किया है।
प्रिंसिपल ने दी शुभकामनाएं
छात्राओं की इस शानदार उपलब्धि पर उर्सुलाइन कॉन्वेंट की प्रधानाचार्य सिस्टर टेरेसा तिग्गा ने खुशी जाहिर की। उन्होंने सभी मेधावी छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि यह स्कूल के कठोर अनुशासन और शिक्षकों की मेहनत का परिणाम है।

