ईरान के साथ जारी भीषण संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकाबंदी ने दुनिया भर में ईंधन का संकट पैदा कर दिया है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट साझा कर हलचल मचा दी है। ट्रंप ने विशेष रूप से ब्रिटेन (UK) जैसे उन देशों पर निशाना साधा है, जिन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में अमेरिका का साथ देने से इनकार कर दिया था। ट्रंप ने अब दुनिया के देशों को 3 ऑपशन दिया है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जाकर खुद अपना तेल छीन लें : ट्रंप
ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा कि जो देश होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण जेट फ्यूल की कमी से जूझ रहे हैं, उनके लिए दो ही रास्ते हैं: पहला—वे अमेरिका से ईंधन खरीदें क्योंकि वहां पर्याप्त भंडार है, और दूसरा—वे “देर से ही सही, थोड़ी हिम्मत जुटाएं और सीधे स्ट्रेट (होर्मुज) जाकर अपना तेल खुद छीन लें।” ट्रंप ने दोटूक शब्दों में कहा कि अब अमेरिका उनकी मदद के लिए हमेशा खड़ा नहीं रहेगा क्योंकि इन देशों ने जरूरत पड़ने पर अमेरिका का साथ नहीं दिया।
आसमान छू रही जेट फ्यूल की कीमतें
होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली तेल की आपूर्ति ठप होने का सबसे बुरा असर एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट फ्यूल पर पड़ा है। वैश्विक स्तर पर इसकी कीमतों में ऐतिहासिक उछाल देखा जा रहा है:
- सिंगापुर और एशिया: सिंगापुर में जेट फ्यूल की कीमतें 114% से अधिक बढ़कर $200 प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।
- यूरोप: उत्तर-पश्चिमी यूरोप में कीमतें लगभग दोगुनी होकर $1,500 प्रति मीट्रिक टन ($210/bbl) के पार चली गई हैं।
- अमेरिका: अमेरिका में भी औसत जेट फ्यूल की कीमत में करीब 58% की वृद्धि हुई है और यह $157.41 प्रति बैरल तक पहुंच गई है।
- भारत: भारत के महानगरों में भी एटीएफ की कीमतें 96 हजार 638 रुपये प्रति किलोलीटर के स्तर को छू रही हैं।
संकट का कारण और वैश्विक प्रभाव
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है, जहाँ से वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर जेट फ्यूल का निर्यात 60% तक गिर गया है। ट्रंप के बयान ने इस संकट को और गहरा दिया है, क्योंकि यह सीधे तौर पर नाटो (NATO) सहयोगियों के बीच दरार और

