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जर्मनी में करोड़ों का बिजनेस, इटली में अंगूर के बाग को छोड़ गांव लौटे अभिनव, अब किसानों की बदल रहे तकदीर

कहते हैं कि पंख कितने भी ऊंचे उड़ लें, परिंदा शाम को अपने घोंसले में ही लौटता है। लेकिन जब कोई परिंदा सात समंदर पार जर्मनी और इटली जैसे देशों में कामयाबी के झंडे गाड़ने के बाद अपनी माटी का कर्ज उतारने वापस आए, तो वह मिसाल बन जाता है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है लखीसराय के बड़हिया निवासी अभिनव की। अभिनव ने न केवल विदेश में करोड़ों की कंपनी खड़ी की, बल्कि अब वह बिहार के किसानों को ‘स्मार्ट’ बनाने के मिशन पर निकल पड़े हैं।

अभिनव का सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। बिहार में शुरुआती शिक्षा पूरी करने के बाद वह उच्च शिक्षा के लिए इटली चले गए। वहां उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ तोरन्तों से अर्थशास्त्र (Economics) में स्नातकोत्तर (PG) किया। उनके पास तकनीकी ज्ञान और बाजार की गहरी समझ थी, जिसके दम पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

साल 2012 में उन्होंने प्रसिद्ध यात्रा कंपनी ‘त्रिवागो’ (Trivago) ज्वाइन की और उसके इंडिया हेड बने। इसके बाद उन्होंने डिजिटल पेमेंट दिग्गज ‘पेटीएम’ के साथ भी मार्केटिंग हेड के रूप में काम किया।

अभिनव ने अपनी मेहनत की बदौलत जनवरी 2025 में जर्मनी में अपनी खुद की ब्लॉकचेन और डिजिटल वॉलेट कंपनी ‘RIBBIT’ स्थापित की। आज यह कंपनी दुनिया के 30 से 40 देशों में सेवाएं दे रही है। अभिनव का उद्देश्य उन लोगों तक बैंकिंग सुविधाएं पहुँचाना है, जो आज भी मुख्यधारा की वित्तीय व्यवस्था से कटे हुए हैं। उनका डिजिटल वॉलेट वैश्विक स्तर पर भुगतान को सरल और सुरक्षित बनाता है।

अभिनव बताते हैं कि जब वे इटली के विश्वविद्यालय में दाखिला लेने गए थे, तब उनसे पूछा गया था कि “हम आपको ही स्कॉलरशिप या एडमिशन क्यों दें?” तब अभिनव ने जवाब दिया था— “मैं एक ऐसे राज्य (बिहार) से आता हूँ जो बहुत पिछड़ा है। अगर मुझे यहाँ शिक्षा मिलेगी, तो मैं वापस जाकर अपने लोगों के लिए कुछ करूँगा।”

आज अभिनव उसी वादे को पूरा कर रहे हैं। इटली में उनका खुद का घर है, जमीन है और वहां वे अंगूर की खेती (Vineyards) भी करते हैं। लेकिन 1995 में गांव छोड़ने के बाद, 55 देशों का भ्रमण करने के बाद उन्हें अपनी मिट्टी की खुशबू वापस ले आई।

अभिनव ने देखा कि यूरोप में किसान तकनीक के सहारे बहुत अमीर हैं, जबकि बिहार का किसान सब कुछ उगाकर भी गरीब है। उन्होंने महसूस किया कि बिहार में किसान मेहनत तो करते हैं, लेकिन उन्हें तकनीकी ज्ञान और सही बाजार (Market Linkage) नहीं मिल पाता।

मिशन 5000 किसान: किसानों की मदद के लिए अभिनव ने FPO (Farmer Producer Organization) का गठन किया है। वर्तमान में:

  • 750+ किसान उनके साथ सीधे जुड़े हुए हैं।
  • 5000 किसानों को अगले साल तक जोड़ने का लक्ष्य है।
  • मुख्य ध्यान दलहन और तिलहन की फसलों पर है।

अभिनव सिर्फ खेती नहीं सिखा रहे, बल्कि किसानों को ‘उद्यमी’ बना रहे हैं। वे किसानों को बेहतर बीज, आधुनिक तकनीक और सबसे महत्वपूर्ण— उनके उत्पाद को ‘ब्रांड’ बनाकर बाजार में उचित मूल्य दिलाने पर काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि जब तक किसान समूहों में नहीं आएंगे और बिचौलियों का तंत्र खत्म नहीं होगा, तब तक उनकी आय नहीं बढ़ेगी।

सफल उद्यमी अभिनव भावुक होकर कहते हैं, “मेरे पिता भी किसान थे। जब मैंने दुनिया घूमी और देखा कि विकसित देशों के किसान समृद्ध हैं, तो सवाल उठा कि हम सबकुछ उगाने के बाद भी गरीब क्यों हैं? इसी ‘क्यों’ का जवाब ढूँढने और उसे बदलने मैं वापस आया हूँ।”

आज लखीसराय का यह ‘लाल’ अपनी वैश्विक सफलता का अनुभव बिहार के खेतों में उतार रहा है। अभिनव की यह पहल उन युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश है जो विदेश जाकर अपनी जड़ों को भूल जाते हैं। लखीसराय के खेतों में अब ब्लॉकचेन के दिमाग और किसान के हाथ मिलकर समृद्धि की नई इबारत लिख रहे हैं।

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