बीते ढाई दशक में जहां सत्ता विरासत के इर्द-गिर्द घूम रही है, वहीं पूर्णिया की माटी से एक ऐसी नेत्री उभरकर सामने आती है, जो ग्रामीण परिवेश में न केवल पैदा हुई, बल्कि उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वह घर की दहलीज लांघकर सदन की चौखट तक पहुंचेगी। लेकिन समय का पहिया कुछ इस कदर घूमा कि पहले उसकी आंखों में आंसू आए और फिर उसके जीवन का राजयोग प्रारंभ हुआ। यह राजयोग उसे केवल किस्मत से नहीं, बल्कि संघर्ष और साहस के बूते प्राप्त हुआ। हम बात कर रहे हैं बिहार की राजनीति की कद्दावर नेता लेशी सिंह की, जिन्हें आज सीमांचल की राजनीति का दमदार चेहरा माना जाता है। 7 मई को लेशी सिंह ने न केवल अपने राजनीतिक जीवन में आठवीं बार बिहार सरकार में मंत्री पद की शपथ ली, बल्कि उन्होंने यह भी साबित कर दिया कि सीमांचल में फिलहाल उनसे बड़ा राजनीतिक चेहरा कोई दूसरा नहीं है।
घर की चौखट से सदन की दहलीज तक
लेसी सिंह के राजनीतिक जीवन की शुरुआत किसी उत्सव से नहीं, बल्कि एक गहरे शोक से हुई थी। साल 2000 में उनके पति मधुसूदन सिंह उर्फ बूटन सिंह की हत्या ने उनके जीवन को झकझोर कर रख दिया था। उस कठिन दौर में, जब एक महिला के लिए घर से बाहर निकलना भी चुनौतीपूर्ण था, लेसी सिंह ने दुख को शक्ति में बदला। उन्होंने पहली बार घर की चौखट लांघी और समता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचीं। 24 साल पहले शुरू हुआ वह सफर आज एक ऐसे मुकाम पर है जहाँ वे सीमांचल की सबसे मजबूत आवाज बन चुकी हैं।
धमादहा में तोड़ा जातीय और सामाजिक अवरोध
धमदाहा विधानसभा क्षेत्र, जहाँ मुस्लिम और यादव मतदाताओं की बड़ी आबादी है, वहां लेसी सिंह ने अपनी एक अलग पहचान बनाई। उन्होंने कभी खुद को केवल एक ‘नेता’ के रूप में पेश नहीं किया, बल्कि क्षेत्र की ‘बहू’ और ‘बेटी’ बनकर लोगों के दिलों में जगह बनाई। यही कारण है कि 2005, 2010, 2015, 2020 और 2025 के चुनावों में जनता ने उन पर अटूट विश्वास जताया। विरोधियों के जातीय समीकरण उनके सहज और मृदु स्वभाव के सामने हमेशा कमजोर साबित हुए।
अनुभव और विश्वास की कसौटी पर खरी
लेसी सिंह का कद नीतीश कुमार की कैबिनेट में लगातार बढ़ता गया है। उन्होंने महिला आयोग की अध्यक्ष से लेकर समाज कल्याण और खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विभागों को कुशलता से संभाला है।
उनके मंत्री बनने का गौरवशाली सफर:
- मार्च 2014: पहली बार नीतीश मंत्रिमंडल में उद्योग मंत्री बनीं।
- 2014-2015: जीतनराम मांझी और फिर नीतीश कैबिनेट में समाज कल्याण व आपदा प्रबंधन विभाग संभाला।
- 2021 से 2026: लगातार खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की जिम्मेदारी संभाली।
- 7 मई 2026: आठवीं बार मंत्री पद की शपथ लेकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया।
सीमांचल की उम्मीदों का नया चेहरा
आठवीं बार मंत्री पद की शपथ लेना यह दर्शाता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को उनके प्रशासनिक अनुभव और निर्णय लेने की क्षमता पर गहरा भरोसा है। पूर्णिया और पूरे सीमांचल के लिए उनका मंत्री बनना विकास की नई उम्मीदें लेकर आया है। लेसी सिंह ने साबित कर दिया है कि यदि जनसेवा का जज्बा सच्चा हो, तो व्यक्ति संघर्ष की आग से निकलकर भी राजनीति के शिखर को छू सकता है। यह सफर एक मिसाल है कि कैसे एक महिला ने व्यक्तिगत त्रासदी को जनसेवा के संकल्प में बदलकर बिहार की राजनीति में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज कराया।

