काले घने बादलों के बीच चमकती हुई आसमानी बिजली (वज्रपात) का दृश्य, जो बिहार में मानसून के दौरान ठनका गिरने से हुए जान-माल के नुकसान और प्राकृतिक आपदा को दर्शाता है।

आसमानी आफत ने छीनीं मासूमों की मुस्कान: दानापुर में दो बच्चियों समेत बिहार में 8 जिंदगी लील गया ठनका

पटना । न्यूजस्टिच

बिहार में मॉनसून के प्रवेश और मौसम के बदलते मिजाज के बीच एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में कुदरत का ऐसा कहर बरपा है जिसने कई हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया। अलग-अलग जिलों में आसमानी बिजली (ठनका) गिरने की घटनाओं में अब तक कम से कम 8 लोगों की असामयिक मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग इस वज्रपात में गंभीर रूप से झुलस गए हैं। इस भीषण प्राकृतिक आपदा को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन तुरंत राहत और बचाव कार्य में जुट गया है।

दानापुर और औरंगाबाद में सबसे भीषण तबाही

सरकारी आंकड़ों और प्राथमिक रिपोर्टों के अनुसार, इस आसमानी आफत का सबसे क्रूर चेहरा औरंगाबाद और दानापुर में देखने को मिला। दानापुर में ठनका गिरने से दो मासूम बच्चियों की झुलसकर मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना के बाद से पूरे इलाके में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, औरंगाबाद जिले में भी वज्रपात की चपेट में आने से दो लोगों की जान चली गई है।

खेतों में काम कर रहे अन्नदाताओं पर टूटी बिजली

यह आसमानी आफत उन किसानों के लिए भी काल बनकर आई जो खेतों में देश का पेट भरने के लिए मेहनत कर रहे थे। नवादा और गया जिलों से आई खबरों के मुताबिक, खेतों में काम करने के दौरान अचानक हुए वज्रपात की चपेट में आने से एक-एक किसान की मौत हो गई। इसके अलावा, खगड़िया जिले में भी एक व्यक्ति की जान चली गई है। वहीं, सारण के छपरा में ठनका गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि एक महिला गंभीर रूप से झुलस गई, जिसे आनन-फानन में इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

प्रशासन मुस्तैद, मौसम विभाग की बड़ी अपील

इस संकट की घड़ी में स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने की कोशिशों में जुटी हैं। दूसरी ओर, मौसम विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लोगों से बेहद सतर्क रहने की अपील की है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि खराब मौसम, तेज हवाओं और बारिश के दौरान लोग घरों से बाहर निकलने से बचें और सुरक्षित पक्के मकानों की शरण लें। विशेषकर ग्रामीण इलाकों में लोगों को पेड़ों, खेतों या बिजली के खंभों के नीचे खड़े न होने की सख्त हिदायत दी गई है, क्योंकि ऐसी जगहों पर वज्रपात का खतरा सबसे अधिक होता है।