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शिक्षा में सांप्रदायिकता बर्दाश्त नहीं…मधेपुरा में सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूल नामकरण पर बवाल, NSUI ने पोती कालिख

मधेपुरा। न्यूजस्टिच
बिहार सरकार की मॉडल स्कूल योजना मधेपुरा में विवादों के घेरे में आ गई है। शहर के ऐतिहासिक रासबिहारी उच्च विद्यालय का नाम बदलकर ‘सरस्वती विद्या निकेतन (मॉडल स्कूल)’ किए जाने के फैसले पर छात्र संगठन NSUI ने कड़ा रुख अपनाया है। NSUI कार्यकर्ताओं ने स्कूल के नए बोर्ड पर कालिख पोतकर अपना विरोध दर्ज कराया।

NSUI का उग्र प्रदर्शन, दीवार पर लिखा-शिक्षा में सांप्रदायिकता बर्दाश्त नहीं
NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष निशांत यादव के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र कार्यकर्ता विद्यालय परिसर पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने भवन पर लिखे नए नाम ‘सरस्वती विद्या निकेतन’ पर कालिख पोती और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने स्कूल की दीवार पर लिखा कि “शिक्षा में सांप्रदायिकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। NSUI ने आरोप लगाया कि बिहार सरकार मॉडल स्कूल बनाने के नाम पर पुरानी और ऐतिहासिक संस्थाओं की पहचान मिटाने तथा शिक्षा व्यवस्था का भगवाकरण करने की कोशिश कर रही है।

क्या है मधेपुरा मॉडल स्कूल विवाद?
बिहार सरकार ने हाल ही में राज्य के 551 विद्यालयों को मॉडल स्कूल के रूप में अपग्रेड करने की शुरुआत की है। इसी योजना के तहत मधेपुरा के प्रतिष्ठित रासबिहारी उच्च विद्यालय को ‘सरस्वती विद्या निकेतन (मॉडल स्कूल)’ नाम दिया गया। हालांकि, नाम बदलने की घोषणा के साथ ही इसका विरोध शुरू हो गया था। सदर विधायक प्रो. चंद्रशेखर समेत कई स्थानीय नेताओं और सामाजिक संगठनों ने इसे ऐतिहासिक धरोहर के साथ खिलवाड़ बताते हुए जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा था।

NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष निशांत यादव का बयान
प्रदर्शन के दौरान NSUI नेता निशांत यादव ने कहा कि मधेपुरा महान समाजवादियों की धरती है। रासबिहारी मंडल जैसे दिग्गज समाजवादी नेता के नाम से जुड़े संस्थान की पहचान बदलना इतिहास को मिटाने जैसा है। सरकार नए स्कूल बनाने के बजाय पुराने संस्थानों का नाम बदलने की राजनीति कर रही है। यह दलित, पिछड़े और वंचित वर्ग के जननेताओं की विरासत पर हमला है। यदि यह फैसला वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन और तेज होगा।”

 मधेपुरा में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी
इस घटनाक्रम के बाद मधेपुरा में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। एक तरफ जहाँ प्रशासन इसे आधुनिक शिक्षा की दिशा में कदम बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष और छात्र संगठन इसे सामाजिक पहचान से जोड़कर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। अब देखना होगा कि सरकार इस विरोध के बाद नामकरण के फैसले पर पुनर्विचार करती है या नहीं।