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डेढ़ साल की बच्ची से दरिंदगी, साढ़े 6 महीने में इंसाफ; DNA जांच के बाद आरोपी को अंतिम सांस तक उम्रकैद

सहरसा। न्यूजस्टिच
डेढ़ साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म के मामले में सहरसा की अदालत ने बेहद सख्त फैसला सुनाया है। घटना के महज साढ़े छह महीने के भीतर आरोपी को अंतिम सांस तक सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। साथ ही अदालत ने उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई के साथ वैज्ञानिक साक्ष्यों और डीएनए जांच ने अहम भूमिका निभाई। मामला सौरबाजार थाना क्षेत्र का है। 26 फरवरी 2026 को डेढ़ साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना सामने आई थी। बच्ची को गंभीर हालत में देखकर परिवार के लोगों ने पुलिस से शिकायत की। मामला सामने आते ही पुलिस ने इसे बेहद गंभीरता से लिया और तत्कालीन एसपी हिमांशु खुद घटनास्थल पर पहुंचे।

घटनास्थल से ही शुरू हुई कार्रवाई
पुलिस के मुताबिक, एसपी ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद वहीं विशेष जांच टीम का गठन किया। एफएसएल टीम को बुलाकर घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए गए। इसके बाद पुलिस टीम ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की और आरोपी राज कुमार शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। जांच को सिर्फ बयान और पारंपरिक साक्ष्यों तक सीमित नहीं रखा गया। पुलिस ने वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाए और मामले में डीएनए जांच भी कराई। जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने निर्धारित समय के भीतर अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया।

14 मई को चार्जशीट, 4 जून को आरोप गठन
मुख्यालय डीएसपी धीरेन्द्र कुमार पांडेय के अनुसार, पुलिस ने 14 मई को अदालत में आरोप पत्र समर्पित कर दिया था। इसके बाद अदालत में मामले की सुनवाई तेजी से आगे बढ़ी। 4 जून को आरोपी के खिलाफ आरोप का गठन किया गया। इसके बाद मुकदमे की सुनवाई पूरी करते हुए 3 सितंबर को जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश षष्ठम सह विशेष न्यायाधीश पॉक्सो राकेश कुमार राकेश की अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए अंतिम सांस तक सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

पुलिस ने कहा- वैज्ञानिक जांच बनी अहम कड़ी
मुख्यालय डीएसपी धीरेन्द्र कुमार पांडेय ने बताया कि घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन एसपी ने घटनास्थल पर ही विशेष जांच टीम गठित कर दी थी। टीम ने प्रभावी और वैज्ञानिक तरीके से अनुसंधान करते हुए साक्ष्य जुटाए। जांच के दौरान डीएनए परीक्षण भी कराया गया। डीएसपी के मुताबिक, घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई से लेकर अदालत के फैसले तक की पूरी प्रक्रिया करीब साढ़े छह महीने में पूरी हुई। उन्होंने कहा कि मामले में त्वरित अनुसंधान और वैज्ञानिक साक्ष्य के आधार पर आरोपी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की गई। यानी इस केस में सिर्फ सख्त सजा ही कहानी नहीं है, बल्कि घटनास्थल से शुरू हुई जांच, वैज्ञानिक साक्ष्य, डीएनए टेस्ट और समयबद्ध चार्जशीट ने इसे महज साढ़े छह महीने में फैसले तक पहुंचाया।