पूर्णिया।न्यूजस्टिच
सम्राट सरकार ने सूबे के दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले किडनी मरीजों के लिए एक बड़ा और जीवनरक्षक कदम उठाया है। सरकार ने राज्य के सभी अनुमंडल अस्पतालों में मुफ्त एवं रियायती डायलिसिस सेवा शुरू करने का निर्णय लिया है। राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा लोक-निजी भागीदारी (पीपीपी मोड) के तहत इन केंद्रों को स्थापित करने से न केवल गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को महंगे इलाज से मुक्ति मिलेगी, बल्कि उन्हें अपने ही शहर या कस्बे में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। उक्त बातें भाजपा नेता डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने कही हैं। डॉ. एके गुप्ता ने राज्य सरकार के फैसला का स्वागत करते हुए सरकार और मुख्यमंत्री को बधाई भी दी है।
2000 के दशक का वो दौर: जब इलाज के अभाव में टूटती थीं सांसें
आज से दो दशक पहले यानी 2000 के शुरुआती सालों को याद करें, तो बिहार में किडनी मरीजों की स्थिति बेहद कारुणिक थी। उस दौर में किडनी फेल होना किसी गरीब या मध्यमवर्गीय परिवार के लिए सीधे आर्थिक तबाही और मृत्यु का पर्याय माना जाता था। उस समय पूरे राज्य में पटना के गिने-चुने मेडिकल कॉलेजों या महंगे निजी अस्पतालों के अलावा कहीं भी डायलिसिस की व्यवस्था नहीं थी। अनुमंडल या ग्रामीण इलाकों के मरीजों को हफ्ते में दो से तीन बार पटना या पड़ोसी राज्यों के चक्कर लगाने पड़ते थे। जर्जर सड़कों और परिवहन के अभाव में कई मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते थे। निजी सेंटरों में डायलिसिस का खर्च इतना अधिक था कि परिवारों को अपने खेत, घर और गहने तक बेचने पड़ते थे। सही समय पर इलाज न मिलने से अनगिनत जिंदगियां समय से पहले ही खत्म हो जाती थीं।
ग्रामीण इलाकों में बदलेगी स्वास्थ्य की तस्वीर
अनुमंडल स्तर पर डायलिसिस केंद्र शुरू होने से राज्य के ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे की पूरी तस्वीर बदलने जा रही है। मरीजों को अब डायलिसिस के लिए सौ-दो सौ किलोमीटर दूर बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। समय और किराया दोनों की बचत होगी। ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम’ और राज्य सरकार की योजना के तहत बीपीएल (राशन कार्डधारी) मरीजों का पूरा इलाज 100% मुफ्त होगा। सामान्य (एपीएल) श्रेणी के मरीजों को भी निजी लैब या अस्पतालों की तुलना में बेहद मामूली और तय दरों पर सुविधा मिलेगी। सभी अनुमंडल अस्पतालों में नई हेमोडायलिसिस मशीनें लगाई जा रही हैं और प्रशिक्षित तकनीशियनों व डॉक्टरों की तैनाती की जा रही है।
जनहित में एक सराहनीय पहल
2000 के दशक की लाचारी, तबाही और बदहाली से निकलकर आज बिहार का स्वास्थ्य तंत्र अनुमंडल स्तर तक आधुनिक मेडिकल सुविधाएं पहुंचाने के दौर में पहुंच चुका है। अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक जीवनरक्षक सेवाएं पहुंचाने का बिहार सरकार का यह निर्णय अत्यंत सराहनीय और स्वागत योग्य है। यह फैसला राज्य के लाखों जरूरतमंद मरीजों के लिए एक नया जीवनदान साबित होगा।

