बिहार में सुशासन की बात अब खोखली लग रही है। पहले पटना में NEET छात्रा की हत्या, फिर पूर्णिया में रील के चक्कर में सूरज की हत्या और अब राजधानी पटना से महज 50 किलोमीटर दूर आरा में 18 साल के छात्र का बेरहमी से मर्डर। भोजपुर के आरा में हुई हत्याकांड की पटकथा पूर्णिया में सोशल मीडिया इंफ्लएंसर सूरज बिहारी के हत्या के जैसे ही है।
कोचिंग के लिए निकला, लौटकर आई लाश
नगर थाना क्षेत्र के धनुपरा निवासी उपेंद्र कुमार का पुत्र सन्नी हर दिन की तरह नवादा थाना क्षेत्र के केजी रोड स्थित अपनी कोचिंग के लिए निकला था। घर से निकलते वक्त उसने माता-पिता से कहा था- “कोचिंग जा रहा हूं, जल्द लौट आऊंगा।” लेकिन परिजनों को क्या पता था कि सन्नी की यह शिक्षा और उसका यह सफर अंतिम होने वाला है। शाम तक जब वह नहीं लौटा, तो तलाश शुरू हुई, जो अंततः रेलवे अंडरपास के पास उसकी लाश मिलने पर खत्म हुई।
सोशल मीडिया का ‘डेथ ट्रैप’: इंस्टाग्राम विवाद बना वजह
इस हत्याकांड का एंगल पूरी तरह से पूर्णिया के सूरज बिहारी केस की याद दिलाता है। सूत्रों और परिजनों के अनुसार, सन्नी का इंस्टाग्राम पर एक लड़की से बातचीत को लेकर कुछ विवाद हुआ था। आरोप है कि उस लड़की के बॉयफ्रेंड ने सन्नी को ‘सबक सिखाने’ की धमकी दी थी। अपराधियों ने पहले सन्नी का अपहरण किया और फिर सुनसान जगह ले जाकर बेरहमी से उसकी हत्या कर दी। साक्ष्य छुपाने के उद्देश्य से शव को रेलवे अंडरपास के पास फेंक दिया गया ताकि इसे हादसा करार दिया जा सके।
पुलिस की कार्रवाई और जांच का दायरा
घटना के बाद इलाके में आक्रोश का माहौल है। सदर एसडीपीओ के नेतृत्व में पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों (CCTV और Call Details) के आधार पर 3 संदिग्धों को हिरासत में लिया है।
“हम सोशल मीडिया चैट्स और कॉल रिकॉर्ड्स खंगाल रहे हैं। प्रेम-प्रसंग और डिजिटल विवाद की बात सामने आ रही है। विशेष टीम गठित कर दी गई है और जल्द ही मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।” — नवादा थाना प्रभारी
बड़ा सवाल: डिजिटल नफरत का शिकार होती युवा पीढ़ी
पूर्णिया के सूरज बिहारी से लेकर आरा के सन्नी तक, बिहार के युवाओं के बीच सोशल मीडिया अब एक ‘वॉर जोन’ बनता जा रहा है। एक तरफ बिहार में विकास के दावे हैं, तो दूसरी तरफ रंजिश और बदले की ऐसी आग है जिसमें 18-18 साल के युवाओं के सपने स्वाहा हो रहे हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे न्याय की गुहार लगा रहे हैं।

