बिहार के विकास मानचित्र पर पूर्णिया अब एक प्रमुख ‘हवाई केंद्र’ बनकर उभरा है। दशकों के इंतजार के बाद शुरू हुआ पूर्णिया हवाई अड्डा (@aaipxnairport) उम्मीदों से कहीं अधिक सफल साबित हो रहा है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2025 में परिचालन शुरू होने के बाद से अब तक महज पांच महीनों के भीतर 1,00,000 से अधिक यात्रियों ने इस एयरपोर्ट से सफलतापूर्वक यात्रा की है।
सीमांचल की लाइफलाइन बना पूर्णिया एयरपोर्ट
पूर्णिया हवाई अड्डे की यह सफलता केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस क्षेत्र की आवश्यकता को दर्शाती है। सीमांचल और कोसी क्षेत्र के लोगों को पहले हवाई यात्रा के लिए बागडोगरा या पटना का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब घर के पास ही हवाई सुविधा मिलने से समय और संसाधन दोनों की बचत हो रही है। 1 लाख यात्रियों का यह आंकड़ा साबित करता है कि पूर्णिया हवाई अड्डा पूर्वोत्तर बिहार की ‘इकोनॉमिक लाइफलाइन’ बन चुका है।
व्यापार और पर्यटन को मिली नई ऊर्जा
हवाई सेवा के सुचारू संचालन से केवल आम यात्री ही नहीं, बल्कि व्यापारी वर्ग को भी बड़ा लाभ मिला है। मक्का उत्पादकों, स्थानीय उद्यमियों और सिलीगुड़ी-नेपाल सीमा से सटे व्यापारियों के लिए यह एक वरदान साबित हो रहा है। इसके साथ ही, पर्यटन के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं खुली हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हवाई संपर्कता बढ़ने से आने वाले समय में पूर्णिया में रियल एस्टेट और होटल इंडस्ट्री में भी बड़ा उछाल देखने को मिलेगा।
समग्र विकास की ओर बढ़ते कदम
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा प्रचालित यह एयरपोर्ट यात्रा को सरल बनाने के साथ-साथ बिहार के समग्र विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। सरकार की क्षेत्रीय हवाई संपर्कता योजना (RCS) के तहत पूर्णिया का यह मॉडल अन्य छोटे शहरों के लिए एक उदाहरण पेश कर रहा है। आने वाले समय में उड़ानों की संख्या बढ़ने और टर्मिनल विस्तार की संभावनाओं ने स्थानीय लोगों के उत्साह को दोगुना कर दिया है।

