भागदौड़ भरी जिंदगी में अक्सर हम रोज के साधारण खाने दाल-चावल या रोटी-सब्जी से ऊब जाते हैं। अगर आपकी थाली का स्वाद भी फीका पड़ गया है, तो ठंड में प्रसिद्ध लहसुन-प्याज तेज-तड़का चटनी आपके भोजन में जान फूंक सकती है। यह चटनी न केवल जुबान को चटखारा देती है, बल्कि आयुर्वेद के नजरिए से भी किसी औषधि से कम नहीं है।
रसोई की शान: इन साधारण चीजों से आएगी रंगत
इस देसी चटाखे को तैयार करने के लिए आपको बाजार के महंगे सामान की जरूरत नहीं है। आपकी रसोई में मौजूद ये सामग्रियां पर्याप्त हैं:
सब्जियां: 3 बारीक कटे प्याज और 15-20 छिली हुई लहसुन की कलियां।
मसाले: जीरा, सूखी लाल मिर्च, राई, कश्मीरी लाल मिर्च और स्वादानुसार नमक।
तड़का: उड़द दाल, ताजे करी पत्ते और सरसों का तेल।
खास ट्विस्ट: बारीक कटा हरा धनिया और खटास के लिए इमली का गूदा।
बनाने की विधि: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
फ्राई पैन का जादू: कड़ाही में सरसों तेल गरम कर सबसे पहले लहसुन को सुनहरा होने तक भूनें। इसके बाद उसी तेल में जीरा, सूखी मिर्च और प्याज डालकर तब तक पकाएं जब तक प्याज का कच्चापन दूर न हो जाए।
स्मूथ पेस्ट: इस भुने हुए मिश्रण को ठंडा करके मिक्सर में धनिया पत्ती और थोड़े पानी के साथ पीस लें।
स्पेशल तड़का: एक छोटे पैन में राई, उड़द दाल और करी पत्ते का तड़का तैयार करें और इसे पिसी हुई चटनी पर डाल दें। अंत में इमली का घोल और कश्मीरी मिर्च मिलाएं।
स्वाद ही नहीं, सेहत का भी ‘पावरहाउस’
विशेषज्ञों के अनुसार, यह चटनी सर्दियों और बदलते मौसम के लिए एक बेहतरीन इम्युनिटी बूस्टर है:
लहसुन (एलिसिन): यह ब्लड सर्कुलेशन सुधारता है और कोलेस्ट्रॉल लेवल को नियंत्रित रखता है।
प्याज (सल्फर): पाचन तंत्र को मजबूत करता है और पेट की गैस से राहत देता है।
इमली (विटामिन C): इमली की खटास शरीर में आयरन के अवशोषण (Absorption) को बढ़ाती है, जिससे एनीमिया का खतरा कम होता है।
नोट: इस चटनी को आप फ्रिज में एक सप्ताह तक स्टोर कर सकते हैं। यह पराठे, लिट्टी या सादे चावल के साथ एक बेहतरीन ‘साइड डिश’ साबित होती है।

