बांग्लादेश में चुनाव जीतने की ओर बढ़ रही तारिक रहमान की पार्टी BNP

निर्वासन से सत्ता के शिखर तक: कौन हैं तारिक रहमान, जो 17 साल बाद बन सकते हैं बांग्लादेश के प्रधानमंत्री?

भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग, राजनीतिक हिंसा के आरोप में 17 साल तक देश से निर्वासित रहने के बाद अब प्रधानमंत्री बनने की रेस में सबसे आगे हैं तारिक रहमान। बांग्लादेश में चुनाव खत्म हो चुका है और उसमें बांग्लोदश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP के प्रमुख नेता तारिक रहमान ने चुनाव में जीत हासिल की है। इस चुनाव में जीत के बाद उनके प्रधानमंत्री बनने की अटकलें तेज हो गई हैं। जानिए कौन हैं तारिक रहमान और क्यों उन्हें बांग्लादेश छोड़कर एक डेढ दशक से भी अधिक समय तक देश से निर्वासित रहना पड़ा था।  

पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और स्वर्गीय राष्ट्रपति जिया उर रहमान के पोते तारिक रहमान को साल 2018 में ग्रेनेड हमले के आरोप में उम्रकैद की सजा हो चुकी है। उन्हें मार्च 2007 में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद वे इलाज कराने के नाम पर साल 2008 में लंदन चले गए थे। जहां से वे अगले 17 साल तक देश से निर्वासित हो कर रहे।

साल 2025 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद तारिक रहमान देश लौटे। वतनवापसी के बाद मुहम्मद युनूस की अंतरिम सरकार ने उनपर चल रहे 84 मुकदमे को वापस ले लिया। बता दें छात्र विद्रोह के बाद बाद शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी।

BNP के वरिष्ठ संयोजक के रूप में तारिक रहमान ने 2001 में चुनावों में सक्रिय भूमिका निभाई। लेकिन विकिलीक्स में हिंसा भड़काने के आरोप लगने के बाद वे लंदन निर्वासित हो गए। लंदन जाने के बाद भी तारिक डिजिटल तरीके से बांग्लादेश में BNP को चलाते रहे। दिसंबर 2025 में वे बांग्लोदश लौटे, जहां फरवरी 2026 में वे प्रधानमंत्री पद के दावेदार हैं।

बांग्लादेश की राजनीति अब एक बड़े बदलाव के मुहाने पर है। जहाँ एक तरफ शेख हसीना का दशकों पुराना ‘आवामी लीग’ युग समाप्त हुआ है, वहीं तारिक रहमान के नेतृत्व में ‘बीएनपी’ (BNP) की वापसी एक नई दिशा का संकेत है।

बिंदुशेख हसीना (आवामी लीग)तारिक रहमान (BNP)
राजनीतिक विरासतशेख मुजीबुर रहमान की बेटीजिया उर रहमान और खालिदा जिया के बेटे
विचारधाराधर्मनिरपेक्षता और भारत के साथ मजबूत संबंधराष्ट्रवादी राजनीति और ‘पाकिस्तान-चीन’ झुकाव का आरोप
सत्ता का सफरलगातार 15 वर्षों तक प्रधानमंत्री रहीं17 वर्षों तक लंदन में राजनीतिक निर्वासन में रहे
वर्तमान स्थितिछात्र विद्रोह के बाद भारत में शरण लीचुनाव जीतकर प्रधानमंत्री पद के मुख्य दावेदार
मुख्य चुनौतियाँसत्ता विरोधी लहर और भ्रष्टाचार के आरोपमुकदमों से मुक्ति के बाद छवि सुधारना और अर्थव्यवस्था संभालना

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