पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव (PUSU) में नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी की अंतिम सूची जारी होते ही कैंपस का सियासी पारा चढ़ गया है। गुरुवार को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी सूची में बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के नामांकन ‘इनवैलिड’ (अवैध) घोषित कर दिए गए हैं। इस फैसले से सत्ताधारी दल से जुड़े छात्र संगठन छात्र जेडीयू (Chhatra JDU) को सबसे तगड़ा झटका लगा है।
छात्र जेडीयू के अध्यक्ष और महासचिव प्रत्याशी रेस से बाहर
विश्वविद्यालय प्रशासन की स्क्रूटनी में छात्र जेडीयू के अध्यक्ष पद के मजबूत दावेदार प्रेंस कुमार और महासचिव पद के प्रत्याशी मंजीत कुमार का नामांकन रद्द कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार, इनके नामांकन रद्द होने का मुख्य कारण लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों का उल्लंघन है।
क्यों रद्द हुए नामांकन?
विश्वविद्यालय के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, कई उम्मीदवारों के नामांकन इसलिए अवैध पाए गए क्योंकि उनका कॉलेजों में नामांकन हुए 5 साल से अधिक का समय हो चुका था। लिंगदोह कमेटी के नियमों के तहत छात्र संघ चुनाव लड़ने के लिए एक निश्चित समय सीमा और उम्र का प्रावधान है, जिसका उल्लंघन इन उम्मीदवारों पर भारी पड़ा।
NSUI को भी लगा झटका, कैंपस में हंगामा
सिर्फ छात्र जेडीयू ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI के भी कुछ प्रमुख प्रत्याशियों के नामांकन इनवैलिड पाए गए हैं। इस सूची के बाहर आते ही विभिन्न छात्र संगठनों के समर्थकों ने विश्वविद्यालय परिसर में जमकर हंगामा और नारेबाजी की। छात्रों का आरोप है कि स्क्रूटनी प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई है।
चुनाव का अगला शेड्यूल
20 फरवरी: आपत्तियों का निराकरण और शिकायत निवारण समिति की बैठक।
21 फरवरी: नाम वापसी की अंतिम तिथि और उम्मीदवारों की फाइनल लिस्ट।
28 फरवरी: मतदान (सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक) और देर रात तक नतीजे।

