बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने राज्य की सियासी तपिश बढ़ा दी है। निर्वाचन आयोग की जारी अधिसूचना के अनुसार 26 फरवरी से नामांकन की प्रक्रिया शुरू होगी। वहीं 16 मार्च को मतदान होगा। इस बार का चुनाव न केवल संख्या बल का खेल है, बल्कि यह एनडीए के भीतर सहयोगियों के कद और भविष्य की रणनीति का लिटमस टेस्ट भी साबित होने वाला है।
क्या चिराग मां रीना पासवान को भेज सकेंगे राज्यसभा?
राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के मुखिया चिराग पासवान को लेकर है। चर्चा है कि चिराग पासवान एनडीए कोटे से मिलने वाली एक संभावित सीट पर अपनी मां रीना पासवान को राज्यसभा भेजने की तैयारी कर रहे हैं। चिराग के लिए यह केवल एक सीट का मामला नहीं, बल्कि अपने पिता स्वर्गीय रामविलास पासवान की विरासत को उच्च सदन में मजबूती से स्थापित करने का एक भावनात्मक और राजनीतिक कदम है।
विधानसभा का गणित और चिराग की ताकत
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (आर) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 19 सीटें जीती थीं। वर्तमान में एनडीए के पास कुल 202 विधायकों का भारी-भरकम समर्थन है, जबकि विपक्षी महागठबंधन (RJD, कांग्रेस, लेफ्ट) महज 35 सीटों पर सिमट गया है। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए लगभग 41 विधायकों के प्रथम वरीयता के वोट चाहिए। 19 विधायकों के साथ चिराग एनडीए के सबसे मजबूत सहयोगी हैं। उन्हें अपनी मां को राज्यसभा भेजने के लिए एनडीए के अतिरिक्त वोटों के अलावा महज कुछ अन्य विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी, जो मौजूदा संख्या बल को देखते हुए एनडीए के लिए बेहद आसान नजर आ रहा है।
किनका कार्यकाल हो रहा है खत्म?
अप्रैल 2026 में जिन 5 सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। उनमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के दिग्गज शामिल हैं।
जेडीयू (2 सीटें): राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर।
आरजेडी (2 सीटें): लालू यादव के करीबी प्रेमचंद गुप्ता और अमरेंद्र धारी सिंह।
बीजेपी कोटे से (1 सीट): उपेंद्र कुशवाहा (RLM प्रमुख), जिन्हें बीजेपी ने अपने कोटे से राज्यसभा भेजा था।
एनडीए के भीतर दावेदारी की जंग
इस बार समीकरण बदल चुके हैं। आरजेडी के पास विधायकों की संख्या इतनी कम है कि वह अपने दम पर एक भी सीट बचाने की स्थिति में नहीं दिख रही। ऐसे में एनडीए सभी 5 सीटों पर क्लीन स्वीप की तैयारी में है। सीटों के बंटवारे का संभावित फॉर्मूला यह हो सकता है। बीजेपी 2 सीटें, जेडीयू 2 सीटें, सहयोगी दल 1 सीट। इसी एक सीट के लिए घमासान मचा है। चिराग पासवान (19 विधायक) इस रेस में सबसे आगे हैं। वहीं, जीतन राम मांझी की ‘हम’ और उपेंद्र कुशवाहा की ‘आरएलएम’ भी अपनी दावेदारी ठोक रही हैं। हालांकि, चिराग का बढ़ता जनाधार और विधानसभा में उनकी सीटों की संख्या उन्हें इस रेस में सबसे मजबूत दावेदार बनाती है। यदि चिराग पासवान अपनी मां रीना पासवान को राज्यसभा भेजने में सफल रहते हैं, तो यह उनकी राजनीतिक परिपक्वता और एनडीए में उनके बढ़ते दबदबे पर मुहर लगाएगा।
बिहार विधानसभा 243 सीटें
राष्ट्रीय लोकतान्त्रिक गठबंधन (NDA) — 202 सीटें (बहुमत)
भारतीय जनता पार्टी (BJP) – 89 सीटें
जनता दल (यूनाईटेड) (JD(U)) – 85 सीटें
लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) (LJP-RV) – 19 सीटें
हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (Secular) (HAM-S) – 5 सीटें
राष्ट्रवादी लोक मोर्चा (RLM) – 4 सीटें
महागठबंधन (MGB)—35 सीटें
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) – 25 सीटें
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Congress) – 6 सीटें
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (मुक्ति) (CPI-ML) – 2 सीटें
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) (CPI(M)) – 1 सीट
अन्य/स्वतंत्र-कुल 6 सीटें
ऑल इंडिया मजलिस‑ए‑इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) – 5 सीटें
बहुजन समाज पार्टी (BSP) – 1 सीट
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