पूर्णिया। न्यूज स्टिच
ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें सूदखोरों व महंगी माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के चंगुल से बचाने के लिए बिहार सरकार ने ‘जीविका निधि’ के रूप में एक क्रांतिकारी पहल की है। शुक्रवार को खुश्किबाग स्थित जीविका क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में जिले के जीविका कर्मियों को इस नई व्यवस्था की बारीकियों से रूबरू कराया गया।
क्या बैंक लोन की जरूरत खत्म हो जाएगी?
कार्यशाला में प्रशिक्षक अनूप कुमार और राजेश कुमार ने स्पष्ट किया कि जीविका निधि का उद्देश्य बैंकों को विस्थापित करना नहीं, बल्कि बैंकों से ऋण मिलने में होने वाली देरी और जटिलता को समाप्त करना है। अक्सर देखा गया है कि आकस्मिक जरूरतों के लिए महिलाएं 24% जैसे उच्च ब्याज दर पर निजी कंपनियों से कर्ज लेती हैं, जिससे उनका पूरा परिवार कर्ज के जाल में फंस जाता है। जीविका निधि इसी समस्या का समाधान है, जो सस्ता, सुलभ और पारदर्शी ऋण प्रदान करेगी।
₹1800 करोड़ से शुरुआत, पूरी तरह डिजिटल प्रणाली
जीविका निधि की स्थापना 1800 करोड़ रुपये की शुरुआती राशि से की जा रही है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी कार्यप्रणाली है। पूरा लेन-देन मोबाइल ऐप के माध्यम से होगा। दीदियां अपनी ऋण राशि, किस्त और वापसी का विवरण मोबाइल पर देख सकेंगी। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की ‘स्त्री निधि’ की तर्ज पर बिहार में इसे लागू किया गया है। इसमें महिलाओं की प्रबंधन में मुख्य भूमिका होगी। राज्य को 12 भागों में बांटकर 144 सदस्यों का सामान्य निकाय बनेगा, जो आगे चलकर 12 सदस्यीय निदेशक मंडल का चुनाव करेंगे।
क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
जिला परियोजना प्रबंधक ओम प्रकाश मंडल ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की आय का बड़ा हिस्सा केवल कर्ज की अदायगी में चला जाता है। जीविका निधि के आने से अब महिलाओं को आय सृजन की गतिविधियों के लिए त्वरित वित्तीय संसाधन मिलेंगे। अब उन्हें ऋण के लिए हफ़्तों इंतजार नहीं करना पड़ेगा, बल्कि संकुल संघ के माध्यम से प्रक्रिया सरल और तेज होगी।
कार्यशाला का निष्कर्ष
इस कार्यशाला में पूर्णिया जिले के 140 से अधिक कर्मियों ने भाग लिया। अब ये कर्मी ग्रामीण स्तर पर गठित सामुदायिक संस्थानों तक जीविका निधि की जानकारी पहुंचाएंगे। प्रशिक्षकों ने स्पष्ट किया कि यह निधि न केवल महिलाओं को सशक्त बनाएगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक नई जान फूंकेगी।

