भारत ने रक्षा के क्षेत्र में एक और आत्मनिर्भर कदम आगे बढ़ाया है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के तट पर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR), चांदीपुर से वेरी शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS) के तीन लगातार सफल उड़ान परीक्षण किए हैं।
हाई-स्पीड खतरों को बेअसर करने की ताकत
इन परीक्षणों का मुख्य उद्देश्य VSHORADS मिसाइल प्रणाली की उच्च गति वाले खतरों को हवा में ही नष्ट करने की क्षमता का पुनर्मूल्यांकन (Revalidate) करना था। परीक्षण के दौरान मिसाइल ने अलग-अलग गति, रेंज और ऊंचाई पर उड़ रहे लक्ष्यों पर सटीक निशाना साधा। डीआरडीओ के मुताबिक, मिसाइल ने अपने सभी तकनीकी मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी बधाई
इस बड़ी सफलता पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, भारतीय सशस्त्र बलों और रक्षा उद्योग से जुड़ी कंपनियों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि:
“VSHORADS के लगातार तीन सफल परीक्षण एक बड़ी उपलब्धि है। यह प्रणाली जल्द ही हमारे सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए तैयार है, जिससे हमारी वायु रक्षा क्षमताएं और भी मजबूत होंगी।”
क्या है VSHORADS की खासियत?
VSHORADS एक ‘मैन पोर्टेबल’ एयर डिफेंस सिस्टम (MANPADS) है। इसका मतलब है कि इसे सैनिक आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जा सकते हैं।
- स्वदेशी तकनीक: इसे डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं द्वारा भारतीय उद्योग भागीदारों के सहयोग से विकसित किया गया है।
- सटीकता: यह कम दूरी पर उड़ रहे दुश्मन के विमानों, हेलीकॉप्टरों और ड्रोनों को मार गिराने में सक्षम है।
- आधुनिक इंजन: इसमें सॉलिड फ्यूल आधारित मोटर का उपयोग किया गया है जो इसे त्वरित गति प्रदान करती है।
भारतीय सेना के लिए क्यों है अहम?
हाल के वर्षों में युद्ध के बदलते स्वरूप और ड्रोन्स के बढ़ते खतरों को देखते हुए, VSHORADS भारतीय सेना के लिए “गेम चेंजर” साबित हो सकता है। विशेष रूप से पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में, जहाँ भारी एयर डिफेंस सिस्टम ले जाना मुश्किल होता है, वहां यह सिस्टम दुश्मन की हवाई चुनौतियों का मुंहतोड़ जवाब देगा।

