मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सीधे सैन्य संघर्ष का असर अब भारत की सुरक्षा व्यवस्था पर भी दिखने लगा है। नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास, इजराइली दूतावास और ईरानी दूतावास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है। खुफिया एजेंसियों ने इन देशों के मिशनों पर संभावित विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा खतरों को देखते हुए पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
सुरक्षा घेरा हुआ कड़ा
चाणक्यपुरी स्थित डिप्लोमैटिक एन्क्लेव में दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त जवानों के साथ-साथ अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियों को तैनात किया गया है।
- पैट्रोलिंग में इजाफा: पीसीआर वैन और मोटरसाइकिल्स के जरिए दूतावासों के आसपास लगातार गश्त की जा रही है।
- बैरिकेडिंग: दूतावासों की ओर जाने वाले प्रमुख रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है और हर आने-जाने वाले वाहन की सघन तलाशी ली जा रही है।
- सीसीटीवी निगरानी: कंट्रोल रूम से दूतावासों के बाहर की गतिविधियों पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है।
प्रदर्शन की आशंका और वैश्विक स्थिति
भारत में यह सुरक्षा कदम उन रिपोर्टों के बाद उठाए गए हैं जिनमें लोगों द्वारा मिडिल ईस्ट की स्थिति के विरोध में प्रदर्शन करने की आशंका जताई गई है। गौरतलब है कि पिछले 48 घंटों में दुनिया के कई बड़े शहरों में इन देशों के दूतावासों के बाहर भारी विरोध प्रदर्शन हुए हैं:
- पाकिस्तान और इराक: कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास और बगदाद के ‘ग्रीन जोन’ में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें हुई हैं।
- यूरोप और अमेरिका: लंदन, एथेंस और अमेरिका के कई शहरों में ‘युद्ध विरोधी’ संगठनों ने इजराइल और अमेरिकी कार्रवाई के खिलाफ रैलियां निकाली हैं।
भारत सरकार की सतर्कता
भारत सरकार इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है। आज ही सुरक्षा कारणों से सीबीएसई ने खाड़ी देशों में अपनी बोर्ड परीक्षाएं भी स्थगित कर दी हैं। सूत्रों का कहना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक भारत में इन देशों के राजनयिक परिसरों के बाहर कड़ा पहरा जारी रहेगा।

