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परमाणु ठिकानों पर हमला! अमेरिका-इजरायल ने किया हमला, IAEA ने जताई बड़ी चिंता

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने अब सबसे खतरनाक मोड़ ले लिया है। अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त सैन्य कार्रवाई के तहत ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों, जिनमें परमाणु संयंत्र (Nuclear Sites) भी शामिल हैं, को निशाना बनाने का दावा किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि यह हमला ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकने के लिए किया गया ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ है।

सैन्य सूत्रों के अनुसार, हमले में ईरान के प्रमुख परमाणु केंद्रों को टारगेट किया गया है:

  • नतांज (Natanz): ईरान का सबसे मुख्य यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) केंद्र।
  • फोर्डो (Fordow): पहाड़ों के बीच स्थित सुरक्षित साइट, जहाँ उन्नत सेंट्रीफ्यूज होने का दावा किया जाता है।
  • इस्फहान (Isfahan): यहाँ ईरान का न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी सेंटर स्थित है।

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने वियना में बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक में इस पर गहरी चिंता जताई है।

  • IAEA का बयान: एजेंसी ने कहा है कि फिलहाल रेडिएशन (विकिरण) के स्तर में किसी असामान्य बढ़ोतरी के संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन वे ईरानी अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं जिनसे वर्तमान में संचार कटा हुआ है।
  • बड़ी चेतावनी: ग्रॉसी ने चेतावनी दी है कि परमाणु ठिकानों पर हमला न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक पर्यावरणीय आपदा का कारण बन सकता है।

परमाणु ठिकानों पर हमले के बाद ईरान ने इंतकाम का लाल झंडा फहरा दिया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने जवाबी कार्रवाई में मिडिल ईस्ट में स्थित कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायल के शहरों पर मिसाइलें दागी हैं। इसी तनाव के बीच आज कुवैत में कई अमेरिकी विमानों के क्रैश होने की भी खबर आई है।

विशेषज्ञों का विश्लेषण: रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि परमाणु ठिकानों पर हमला नो रिटर्न की स्थिति है। इसके बाद कूटनीति के रास्ते लगभग बंद हो गए हैं और क्षेत्र एक पूर्ण युद्ध (Full-scale War) की ओर बढ़ रहा है।

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