पालघर। न्यूजस्टिच
महाराष्ट्र के औद्योगिक गढ़ तारापुर (बोईसर) में सोमवार दोपहर एक बार फिर सुरक्षा मानकों की पोल खुल गई। तारापुर MIDC स्थित भगेरिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्लांट में हुए भीषण सल्फर ट्राइऑक्साइड (SO₃) गैस रिसाव ने हजारों जिंदगियों को सांसत में डाल दिया। 2,500 लीटर के स्टोरेज टैंक से निकली इस जहरीली गैस ने कुछ ही मिनटों में 3-5 किलोमीटर के दायरे को सफेद धुंध की चादर से ढक दिया, जिससे इलाके में भोपाल गैस त्रासदी जैसी दहशत फैल गई।
दोपहर 2 बजे का वो खौफनाक मंजर
घटना सोमवार दोपहर करीब 2 बजे की है, जब प्लांट के एक टैंक से रिसाव शुरू हुआ। देखते ही देखते हवा में ‘ओलियम’ (फ्यूमिंग सल्फ्यूरिक एसिड) की तीखी गंध फैल गई। बोईसर के डी-जोन, सलवाड़ और पास्थल गांवों में रहने वाले लोगों को अचानक आंखों में असहनीय जलन, खांसी और सांस लेने में तकलीफ होने लगी। प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए 2,600 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया, जिनमें स्कूल में पढ़ रहे करीब 1,600 मासूम छात्र भी शामिल थे।
NDRF और फायर ब्रिगेड का ‘रेस्क्यू ऑपरेशन’
रिसाव की गंभीरता को देखते हुए NDRF, जिला प्रशासन और फायर ब्रिगेड की कई टीमें मौके पर तैनात की गईं। गैस के प्रभाव को कम करने के लिए रिसाव स्थल को रेत से ढका गया। शाम करीब 6:45 बजे रिसाव पर पूरी तरह काबू पाया जा सका। पालघर कलेक्टर डॉ. इंदु रानी जाखड़ और पुलिस अधीक्षक यतीश देशमुख खुद स्थिति की निगरानी कर रहे थे। राहत की बात यह रही कि किसी भी जनहानि की खबर नहीं है, हालांकि तीन लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
कितनी घातक है SO₃ गैस?
विशेषज्ञों के अनुसार, सल्फर ट्राइऑक्साइड (SO₃) हवा की नमी के साथ मिलते ही सल्फ्यूरिक एसिड की सघन धुंध बनाती है। यह फेफड़ों के ऊतकों को जला सकती है और लंबे समय में अस्थमा या ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियों का कारण बनती है।
सवाल: क्या सबक सीखेगा प्रशासन?
यह घटना तारापुर MIDC क्षेत्र में औद्योगिक सुरक्षा पर गंभीर सवालिया निशान लगाती है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सुरक्षा ऑडिट की कमी के कारण ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं। फिलहाल जांच के आदेश दे दिए गए हैं, लेकिन सवाल वही है—क्या प्रशासन और कंपनियां अगली किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं?

