हिमालय की गोद में बसे नेपाल में कल, 5 मार्च 2026 को नई संसद के 275 सदस्यों को चुनने के लिए आम चुनाव आयोजित किए जा रहे हैं। यह चुनाव नेपाल के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने वाला है, क्योंकि यह पिछले साल (सितंबर 2025) हुए उस भीषण जेन जी (Gen Z) युवा आंदोलन के बाद हो रहा है, जिसने पुरानी राजनीतिक व्यवस्था की नींव हिला दी थी।
जेन जी आंदोलन: युवा शक्ति का उदय
सितंबर 2025 में नेपाल के युवाओं (Gen Z) ने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और पुरानी पीढ़ी के नेताओं के खिलाफ एक विशाल और स्वतःस्फूर्त आंदोलन चलाया था। ‘सोशल मीडिया’ और ‘डिस्कॉर्ड’ (Discord) जैसे प्लेटफार्मों से संचालित इस आंदोलन ने तत्कालीन के.पी. शर्मा ओली की सरकार को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया।
- पहला मौका: यह आंदोलन के बाद पहला मौका है जब वही युवा, जिन्होंने सड़कों पर संघर्ष किया था, अब ‘बैलट’ के जरिए अपनी किस्मत और देश का भविष्य तय करेंगे।
- युवा उम्मीदवार: इस चुनाव में 31% से अधिक उम्मीदवार 25 से 40 वर्ष की आयु के हैं, जो नेपाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव है।
नेपाल में लोकतंत्र: राजतंत्र से गणराज्य तक का सफर
नेपाल में लोकतंत्र की यात्रा लंबी और संघर्षपूर्ण रही है:
- पहली बार लोकतंत्र (1951/1959): राणा शासन के अंत के बाद 1951 में लोकतंत्र की नींव पड़ी, लेकिन पहली बार पूर्ण लोकतांत्रिक चुनाव 1959 में हुए।
- पहली निर्वाचित सरकार: 1959 के चुनावों के बाद नेपाली कांग्रेस की पहली लोकतांत्रिक सरकार बनी और बी.पी. कोइराला नेपाल के पहले निर्वाचित प्रधानमंत्री बने (हालांकि 18 महीने बाद ही राजा महेंद्र ने संसद भंग कर दी थी)।
- राजतंत्र का पूर्ण अंत (2008): दशकों के गृहयुद्ध और 2006 के जन-आंदोलन के बाद 28 मई 2008 को नेपाल से 240 साल पुरानी शाह राजशाही का अंत हुआ और इसे ‘संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य’ घोषित किया गया।
वोटरों की संख्या और चुनावी गणित
नेपाल निर्वाचन आयोग के अनुसार, इस बार चुनाव के आंकड़े कुछ इस प्रकार हैं:
- कुल पंजीकृत मतदाता: लगभग 18,903,689 (1.89 करोड़)।
- नए मतदाता: इस बार करीब 8 लाख नए युवा मतदाता पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
- संसदीय सीटें: कुल 275 सीटें (165 प्रत्यक्ष चुनाव और 110 आनुपातिक प्रतिनिधित्व के माध्यम से)।
- मतदान केंद्र: देशभर में 10,967 स्थानों पर 23,112 मतदान केंद्र बनाए गए हैं।
भारत के लिए क्यों अहम है यह चुनाव?
नेपाल में होने वाला कोई भी राजनीतिक बदलाव भारत के लिए सीधे तौर पर महत्वपूर्ण होता है। 2025 के युवा आंदोलन के दौरान सीमा पर सुरक्षा को लेकर भारत ने हाई अलर्ट जारी किया था। अब नई सरकार के गठन के बाद भारत-नेपाल संबंधों (विशेषकर सीमा सुरक्षा और जल विद्युत परियोजनाओं) को लेकर नई दिशा तय होगी। काठमांडू से लेकर हिमालय की तराई तक, कल सुबह 7 बजे से मतदान शुरू होगा। पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या नेपाल के युवा उस बदलाव को हकीकत में बदल पाएंगे जिसका सपना उन्होंने सड़कों पर देखा था।

