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भ्रष्टाचार मुक्त 20 साल का बेदाग सफर! सीएम नीतीश के नामांकन में के बाद अमित शाह ने भविष्य की राजनीति के दिए संकेत

बिहार की राजनीति में आज एक युग के परिवर्तन पर देश के गृह मंत्री ने मुहर लगा दी है। अमित शाह की मौजूदगी में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन, उपेंद्र कुशवाहा, रामनाथ ठाकुर और शिवेश कुमार ने राज्यसभा के लिए अपना पर्चा भरा। नामांकन के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए अमित शाह ने नीतीश कुमार के व्यक्तित्व और कृतित्व की जो व्याख्या की, उसने भविष्य के नए राजनीतिक समीकरणों के संकेत दे दिए हैं।

अमित शाह ने नीतीश कुमार की विदाई को बेहद सम्मानजनक बताते हुए कहा कि उनका कार्यकाल बिहार के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। शाह की बातों के मुख्य बिंदु:

  • बेदाग छवि: “विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री रहते हुए इतने लंबे करियर में नीतीश जी के कुर्ते पर कभी भ्रष्टाचार का कोई दाग नहीं लगा। यह सार्वजनिक जीवन में एक दुर्लभ मिसाल है।”
  • जंगलराज से मुक्ति: शाह ने श्रेय दिया कि नीतीश कुमार ने ही बिहार को ‘जंगलराज’ के अंधेरे से निकालकर विकास की मुख्यधारा से जोड़ा और गांव-गांव तक सड़कें व बिजली पहुँचाई।
  • जे.पी. के सच्चे अनुयायी: 1974 के आंदोलन का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि नीतीश जी ने अपना पूरा जीवन जयप्रकाश नारायण के सिद्धांतों पर चलने में बिताया है।

अमित शाह ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की भी जमकर सराहना की। उन्होंने कहा:

“नितिन नबीन ने राज्य में लंबे समय तक यशस्वी राजनीति की है। अब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में वे राज्यसभा के माध्यम से संसद में अपना बहुमूल्य योगदान देंगे। करोड़ों कार्यकर्ता उनका राष्ट्रीय राजनीति में स्वागत करते हैं।”

शाह ने इस बात पर जोर दिया कि पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की सभी कल्याणकारी योजनाओं को बिहार के हर घर तक पहुँचाने में नीतीश कुमार का सबसे बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि सादगी और शुचिता के जो उच्च मानक नीतीश जी ने स्थापित किए, उसका सम्मान बिहार के लोग हमेशा करेंगे।

अमित शाह के इस संबोधन ने उन अटकलों को शांत करने की कोशिश की है कि नीतीश कुमार को ‘मजबूरी’ में राज्यसभा भेजा जा रहा है। शाह ने इसे एक ‘भव्य स्वागत’ के रूप में पेश किया, जिससे साफ है कि दिल्ली की राजनीति में नीतीश कुमार को कोई बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी (संभवतः उपराष्ट्रपति या मार्गदर्शक की भूमिका) दी जा सकती है।

पटना में आज हुए इस नामांकन ने यह साफ कर दिया है कि बिहार में अब सत्ता की चाबी बीजेपी के पास होगी, लेकिन उस पर नीतीश कुमार का आशीर्वाद और अनुभव हमेशा बना रहेगा।

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