बिहार की राजनीति के दिग्गज और भाजपा के आधार स्तंभ माने जाने वाले नंद किशोर यादव अब संवैधानिक जिम्मेदारी संभालेंगे। राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, उन्हें नागालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। बिहार की राजनीति में दशकों तक अपना लोहा मनवाने वाले यादव की यह नियुक्ति उनके लंबे राजनीतिक अनुभव और सांगठनिक कौशल का सम्मान मानी जा रही है।
बिहार की राजनीति में कितना था प्रभाव?
नंद किशोर यादव का बिहार की राजनीति, विशेषकर पटना और भाजपा के संगठन पर जबरदस्त प्रभाव रहा है। उन्हें बिहार भाजपा का ‘संकटमोचक’ माना जाता रहा है। वे न केवल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे, बल्कि गठबंधन की सरकारों (JDU-BJP) के बीच एक मजबूत कड़ी का काम भी करते थे। पिछड़ी जाति (यादव) से आने के बावजूद, उनकी स्वीकार्यता हर वर्ग में रही है, जिसके कारण वे पटना शहर की राजनीति के बेताज बादशाह बने रहे।
राजनीतिक सफर: पार्षद से विधानसभा अध्यक्ष तक
नंद किशोर यादव के राजनीतिक जीवन की शुरुआत जमीनी स्तर से हुई। पहली बार पार्षद बनें। उन्होंने अपना पहला चुनाव 1978 में पटना नगर निगम के पार्षद के रूप में जीता। फिर 1982 में वे पटना के उप-महापौर (Deputy Mayor) बने। विधानसभा के लिए वे पहली बार 1995 में पटना पूर्व (अब पटना साहिब) से निर्वाचित हुए। वे लगातार 7 बार (1995 से 2025 तक) विधायक चुने गए। पटना साहिब उनकी ऐसी मजबूत सीट रही जिसे विरोधी कभी हिला नहीं पाए।
कैसा रहा राजनीतिक जीवन?
उनका राजनीतिक जीवन उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने शासन और संगठन दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नीतीश कुमार की कैबिनेट में उन्होंने पथ निर्माण, स्वास्थ्य, पर्यटन और मध्यम सिंचाई जैसे विभागों को संभाला। बिहार की सड़कों के कायाकल्प में उनका बड़ा योगदान माना जाता है। 2013 से 2015 के बीच जब भाजपा गठबंधन से अलग हुई, तब उन्होंने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी बहुत ही आक्रामक और प्रभावी ढंग से निभाई। फरवरी 2024 में उन्हें सर्वसम्मति से बिहार विधानसभा का अध्यक्ष चुना गया, जहाँ उन्होंने सदन की गरिमा को बखूबी बनाए रखा। नंद किशोर यादव का नागालैंड का राज्यपाल बनना बिहार भाजपा के लिए एक युग के अंत जैसा है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर यह बिहार के एक अनुभवी राजनेता का बड़ा सम्मान है।

