कैमूर। न्यूजस्टिच
एक तरफ देश विज्ञान और आधुनिकता के दम पर नए आयाम छू रहा है, तो दूसरी तरफ बिहार के कैमूर जिले से अंधविश्वास और प्रशासनिक अनदेखी की एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। अधौरा प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय लोहन्दी करर में भीषण गर्मी और उमस के कारण बेहोश हुईं तीन छात्राओं के मामले को परिजनों ने ‘भूत-प्रेत का साया’ मान लिया। नतीजा यह हुआ कि बीते एक हफ्ते से पूरे गांव ने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया और परिसर में पढ़ाई की जगह झाड़-फूंक का खेल चलने लगा।
क्या है पूरा मामला?
मामला करीब एक सप्ताह पहले का है, जब पढ़ाई के दौरान कक्षा में बैठी तीन बच्चियां अचानक गश्त खाकर गिर पड़ीं। अस्पताल ले जाने के बजाय घबराए परिजन उन्हें घर ले गए और गांव में ओझा (तांत्रिक) को बुला लिया। ओझा ने दावा कर दिया कि स्कूल परिसर में ‘भूत’ का वास है। इस अफवाह के फैलते ही पूरे लोहन्दी करर गांव में दहशत फैल गई और परिजनों ने ऐलान कर दिया कि जब तक ‘भूत’ नहीं भागेगा, बच्चे स्कूल नहीं जाएंगे।
डॉक्टर बोले- भूत नहीं, शारीरिक कमजोरी और गर्मी है वजह
शिक्षकों के काफी समझाने-बुझाने के बाद परिजनों को मेडिकल कैंप और फिर भभुआ सदर अस्पताल ले जाने पर राजी किया गया। अस्पताल में मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. भावना गुप्ता ने बच्चियों की जांच की। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि मामला किसी भूत-प्रेत या अंधविश्वास का नहीं है। तीनों बच्चियां न्यूट्रिशन (पोषण) की कमी के कारण काफी कमजोर हैं। भीषण गर्मी और उमस में शरीर में पानी व ऊर्जा की कमी के चलते वे बेहोश हुई थीं। दवाएं देने के बाद बच्चियों की हालत में सुधार है और वे अब स्कूल जाने के लिए तैयार हैं।
असली ‘भूत’ तो बिजली और संसाधनों की कमी है!
कैमूर पहाड़ी पर स्थित इस स्कूल की कड़वी सच्चाई यह है कि यहाँ बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। पहला बिजली और पंखे न होना. भीषण गर्मी के बावजूद स्कूल में बिजली का कनेक्शन तक नहीं है, जिससे पंखे नहीं चलते। उमस भरे मौसम में बिना पंखे के बंद कमरों में बैठना बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। स्कूल के शिक्षकों ने कई बार शिक्षा विभाग को बिजली आपूर्ति के लिए लिखित आवेदन दिया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। शिक्षकों का आरोप है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) भी मौके पर पहुंचे, लेकिन महज खानापूर्ति कर लौट गए।
किसने क्या कहा?
शिक्षक जावेद अख्तर ने कहा कि हमारे स्कूल में बिजली की व्यवस्था नहीं है। इतनी भीषण गर्मी में पंखा न होने से बच्चे परेशान हो जाते हैं और बेहोश होकर गिर पड़ते हैं। परिजन इसे भूत-प्रेत का चक्कर मानकर बीते एक सप्ताह से बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं।
परिजन मदन सिंह यादव और सितारा देवी ने कहा कि स्कूल में लगातार बच्चे बेहोश हो रहे थे। ओझा को दिखाया तो उसने बताया कि स्कूल में भूत है और झाड़-फूंक भी की। जब सुधार नहीं हुआ तो हम आज भभुआ सदर अस्पताल इलाज कराने लाए हैं।
सदर अस्पताल भभुआ की मनोचिकित्सक डॉ. भावना गुप्ता ने कहा कि इसमें अंधविश्वास जैसी कोई बात नहीं है। तीनों बच्चियां शारीरिक रूप से कमजोर हैं। उन्हें आवश्यक दवाइयां दे दी गई हैं और अब वे बेहतर हैं। हमारी टीम जल्द ही गांव जाकर परिजनों को जागरूक करेगी ताकि अंधविश्वास के चक्कर में बच्चों की पढ़ाई और सेहत का नुकसान न हो।

