डिजिटल डेस्क। न्यूजस्टिच
आधुनिक युग में हम अरबों डॉलर खर्च करके ऐसे विमान बनाते हैं जो कुछ हजार मील उड़ सकें। दुनिया की सबसे लंबी कमर्शियल फ्लाइट भी करीब 20 घंटे ही हवा में रह पाती है। लेकिन कुदरत की इंजीनियरिंग के सामने आज विज्ञान भी बौना साबित हो गया है। अलास्का के बर्फीले तटों से उड़ान भरकर ऑस्ट्रेलिया के तस्मानिया तक पहुँचने वाले एक नन्हे पक्षी ‘बार-टेल्ड गॉडविट’ (B6) ने वह कर दिखाया है जो किसी चमत्कार से कम नहीं है।
सर्जरी के बिना बदला अपना शरीर
उड़ान भरने से पहले यह पक्षी किसी कुशल सर्जन की तरह अपने शरीर में बदलाव करता है। लंबी यात्रा के लिए जगह बनाने और खुद को हल्का करने के लिए यह अपने पाचन अंगों (पेट, आंत और लिवर) को सिकोड़कर लगभग खत्म कर लेता है। यह पक्षी शाब्दिक रूप से अपने ही अंगों को ‘ईंधन’ के रूप में इस्तेमाल करता है ताकि पंखों को ताकत देने वाली चर्बी (Fat) के लिए शरीर में जगह बन सके।
आधा दिमाग सोता है, आधा रास्ता देखता है
11 दिनों की इस निरंतर यात्रा में न तो रनवे है और न ही रुकने का कोई ठिकाना। ऐसे में सवाल उठता है कि यह सोता कब है? गॉडविट का दिमाग एक समय में आधा सोता है और आधा जागता रहता है। यह हवा में ऊंचाइयों पर उड़ते हुए अपनी नींद की शिफ्ट बदलता रहता है। यानी यह एक साथ बेहोश भी होता है और नेविगेट भी कर रहा होता है।
क्वांटम कंपास: आंखों में बसता है जीपीएस
इस पक्षी की नेविगेशन सटीकता आज के जीपीएस सिस्टम को भी शर्मिंदा कर सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसकी आंखों में एक ‘क्वांटम-लेवल’ कंपास होता है, जिससे यह पृथ्वी की चुंबकीय रेखाओं (Magnetic Fields) को सीधे देख सकता है। तारों की स्थिति और वायुमंडलीय दबाव को पढ़ते हुए यह बिना किसी नक्शे के हजारों मील दूर सटीक निशाने पर लैंड करता है।
मशीन बनाम परिंदा
इंसान ने उड़ने के लिए करोड़ों की मशीनें बनाईं, जिन्हें रनवे, ईंधन और पायलट की जरूरत होती है। वहीं, यह 300 ग्राम का जीव केवल अपनी इच्छाशक्ति, चर्बी के भंडार और कुदरती प्रवृत्ति के दम पर 11 दिन तक बिना रुके तूफानों और विपरीत हवाओं से लड़ता रहता है।

