Nitish Kumar resignation letter submission via Sanjay Gandhi to Awadhesh Narain Singh

बिहार में मिशन 2025 का आगाज: नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ का तीसरा चरण शुरू, सीमांचल और कोसी पर नजर

पटना। न्यूजस्टिच
बिहार की राजनीति में चुनावी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी बहुचर्चित ‘संकल्प से सिद्धि तक की समृद्धि यात्रा’ के तीसरे चरण का बिगुल फूंक दिया है। 10 मार्च 2026 से शुरू हो रही यह यात्रा न केवल सरकारी योजनाओं की समीक्षा है, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले जनता की नब्ज टटोलने और कैडर को सक्रिय करने की एक बड़ी रणनीतिक कवायद मानी जा रही है।

कोसी और सीमांचल: रणनीतिक चक्रव्यूह
यात्रा के तीसरे चरण का रूट चार्ट (10 मार्च से 14 मार्च) स्पष्ट करता है कि जदयू (JDU) का मुख्य फोकस कोसी और सीमांचल क्षेत्र पर है। सुपौल, मधेपुरा, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार जैसे जिलों को चुनकर नीतीश कुमार ने सीधे तौर पर उस बेल्ट में सेंध लगाने की कोशिश की है, जिसे विपक्षी गठबंधन का गढ़ माना जाता है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा के जरिए नीतीश कुमार ‘अति पिछड़ा’ (EBC) और अल्पसंख्यक वोट बैंक के बीच अपनी ‘विकास पुरुष’ वाली छवि को फिर से पुख्ता करना चाहते हैं।

यात्रा का कार्यक्रम: ज़िलों पर सीधी नज़र
नीतीश कुमार की यह यात्रा बेहद व्यवस्थित है, जिसमें हर दिन दो प्रमुख ज़िलों को कवर किया जा रहा है:

10 मार्च: सुपौल और मधेपुरा

11 मार्च: अररिया और किशनगंज

12 मार्च: पूर्णिया और कटिहार

13 मार्च: सहरसा और खगड़िया

14 मार्च: बेगूसराय और शेखपुरा

जनता से संवाद और योजनाओं की समीक्षा
पोस्टर का नारा जनता से संवाद, हर जिले में समीक्षा, योजनाओं को नई दिशा साफ संकेत देता है कि मुख्यमंत्री जमीनी स्तर पर फीडबैक लेना चाहते हैं। वह केवल मंच से भाषण नहीं देंगे, बल्कि ज़िला स्तर पर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें करेंगे ताकि सात निश्चय और अन्य कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति जांची जा सके।

पॉलिटिकल मैसेजिंग
इस यात्रा को ‘समृद्धि यात्रा’ का नाम देना एक सकारात्मक नैरेटिव सेट करने की कोशिश है। नीतीश कुमार यह संदेश देना चाहते हैं कि गठबंधन के उतार-चढ़ाव के बीच भी उनका मूल एजेंडा ‘बिहार का विकास’ ही है। सोशल मीडिया हैंडल्स (@JDUOnline) और IT-JD(U) की सक्रियता बताती है कि इस बार जदयू डिजिटल और फिजिकल दोनों मोर्चों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। नीतीश कुमार की यह यात्रा विपक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर सकती है। ऐसे समय में जब चुनावी सरगर्मियां बढ़ रही हैं, नीतीश का सीधे जनता के बीच जाना और ‘समृद्धि’ की बात करना उनकी सोची-समझी राजनीति का हिस्सा है।

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