पटना। न्यूजस्टिच
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की पुत्री और राजद नेता रोहिणी आचार्य ने एक बार फिर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अपने धारदार हमलों से सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए अपने हालिया पोस्ट में रोहिणी ने देश में गैस सिलेंडर की कथित किल्लत और महंगाई को लेकर प्रधानमंत्री पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने लिखा कि सिलेंडर की किल्लत का जश्न कब होगा ? प्रधानमंत्री जी …
प्रधानमंत्री लाइन लगवाओ योजना पर हमला
रोहिणी आचार्य ने प्रधानमंत्री की कार्यशैली पर कटाक्ष करते हुए एक नया नाम दिया है। प्रधानमंत्री लाइन लगवाओ योजना। उन्होंने आरोप लगाया कि इस सरकार के कार्यकाल में आम जनता सिर्फ कतारों में खड़ी रहने को मजबूर है। अपने पोस्ट में उन्होंने सिलसिलेवार ढंग से पिछली घटनाओं का जिक्र करते हुए लिखा कि मोदी जी ने पहले नोटबंदी के लिए लाइन लगवाई। फिर ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए लाइन लगवाई और अब आम जनता गैस सिलेंडर के लिए लाइन में खड़ी है।

इवेंट मैनेजमेंट और जश्न की राजनीति पर निशाना
रोहिणी यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने प्रधानमंत्री पर आपदा को अवसर में बदलने के बजाय उसे जश्न का इवेंट बनाने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री अपनी छवि चमकाने की बीमारी से ग्रस्त हैं। उन्होंने तीखे लहजे में कहा कि सरकार आपदा और इमरजेंसी को भी उत्सव में तब्दील कर देती है, जो आम जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। रोहिणी ने कोविड-19 काल के दौरान सरकार द्वारा दिए गए ‘थाली-कटोरा’ बजाने और ‘दीया-मोमबत्ती’ जलाने वाले आह्वान की याद दिलाते हुए कहा कि बस इस बार फिर से अगर आप थाली-कटोरा या खाली गैस सिलेंडर ही पिटवा देते, तो तमाशा खड़ा करने का आपका प्रयोजन पूरा हो जाता। आपके भक्तों को सिलेंडर की किल्लत पर बात करने के बजाय महामानव का जयकारा लगाने का एक और बहाना मिल जाता।
सियासी मायने और जनता की समस्याएं
रोहिणी आचार्य का यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल लगातार महंगाई और बेरोजगारी को लेकर सरकार को घेर रहे हैं। उनका इशारा स्पष्ट है कि सरकार बुनियादी समस्याओं का समाधान करने के बजाय प्रतीकात्मक राजनीति और पीआर (PR) स्टंट्स पर अधिक ध्यान दे रही है। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने उन समर्थकों पर भी निशाना साधा जो हर परिस्थिति में सरकार का बचाव करते हैं। उन्होंने तंज कसा कि अगर सिलेंडर की किल्लत को भी एक उत्सव की तरह पेश किया जाए, तो जनता की असली पीड़ा जयकारों के शोर में दब जाएगी।

