बिहार में यहां लगता है भूतों का मेला! हर कुछ दिखता है रहस्यमयी और डरावना, 100 सालों से परंपरा जारी

विज्ञान और तकनीक के इस आधुनिक दौर में भूत-पिशाच की बात बेमानी ही होनी चाहिए लेकिन बिहार के रोहतास जिले में आज भी भूतों का मेला लगता है जिसमे इस अंधविश्वास पर आस्था जताने वालों की हर साल भीड़ उमड़ती है। रोहतास जिला के संझौली प्रखंड स्थित घिन्हू ब्रह्म स्थान में हर साल चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र के दौरान अनोखा और रहस्यमयी मेला लगता है। जिसे स्थानीय लोग भूतों का मेला कहते हैं।

चैत्र नवरात्र के दिनों में नौ दिनों तक चलने वाला यह मेला करीब दो किलोमीटर के क्षेत्र में फैला होता है। यहां का माहौल किसी सामान्य धार्मिक मेले जैसा नहीं, बल्कि रहस्यमय और डरावना होता है। चारों ओर चीख-पुकार, अजीब हरकतें और तांत्रिकों द्वारा किए जा रहे तंत्र-मंत्र के जाप के बीच लोग भूत-प्रेत को प्रकोप शांत कराने यहां लोग आते हैं।

इस मेला में सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, झारखंड और अन्य राज्यों से भी लोग आते हैं। मान्यता है कि यहां आने से भूत-प्रेत और नकारात्मक शक्तियों का असर व्यक्ति पर समाप्त हो जाता है। इस मेले में आने वालों में सबसे ज्यादा संख्या महिलाओं की होती है। कई महिलाएं खुले बालों के साथ चीखती-चिल्लाती नजर आती हैं। कोई दौड़ रही होती है, तो कोई जमीन पर लोटती हुई दिखाई देती है।कहा जाता है कि इन महिलाओं पर भूत सवार होता है और वे उसी के प्रभाव में ये हरकतें करती हैं। इस दौरान तांत्रिक उन्हें नियंत्रित करने और उनपर से भूत उतारने की कोशिश करते हैं।

यहां तांत्रिक मंत्रोच्चारण, झाड़-फूंक और तंत्र क्रियाओं के जरिए पीड़ितों को ठीक करने का दावा करते हैं। कई बार वे पीड़ित व्यक्ति की पिटाई भी करते हैं। इस पिटाई के पीछे तांत्रिकों का तर्क होता है कि वे व्यक्ति को नहीं, बल्कि उसके अंदर मौजूद शैतान आत्मा की पिटाई करते हैं, ताकि वह शरीर छोड़कर भाग जाए।इसके अलावा भूत-प्रेत को शांत करने के लिए यहां जानवरों की बलि देने की भी परंपरा है। खासकर मुर्गे की बलि दी जाती है।

जानकारी अनुसार, यह मेला करीब 100 वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा है। साल में दो बार चैत्र और शारदीय नवरात्र में यहां भारी भीड़ जुटती है। इस मेले का दिलचस्प पहलू यह है कि इस मेले में आने वाले ज्यादातर लोग आर्थिक रूप से कमजोर तबके से होते हैं, जो अपनी समस्याओं का समाधान यहां तलाशते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता विकास आनंद कहते हैं कि गरीबी से बड़ा भूत -प्रेत कोई नहीं होता है। आर्थिक रूप से गरीब लोग अपनी समस्या का समाधान अंधविश्वास में तलाशते हैं। जबकि यहां आने वाले तांत्रिक रामप्रवेश पासवान कहते हैं कि पिछले 30 वर्षों से इस मेले में आ रहे हैं। सैकड़ों लोगों को भूत-प्रेत से मुक्ति दिला चुके हैं। इसलिए तो यहां हर वर्ष हजारों लोग आते हैं।

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