बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। नेता प्रतिपक्ष और राजद (RJD) नेता तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के रिश्तों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। तेजस्वी ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री की इच्छा के विरुद्ध उन्हें राज्यसभा भेजने की तैयारी की जा रही है ताकि बिहार में जेडीयू के अस्तित्व को समाप्त किया जा सके।
“जेडीयू में नीतीश की नहीं चलती”
मीडिया से बात करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा, “मुख्यमंत्री की कोई इच्छा नहीं है कि वे राज्यसभा जाएं, उन्हें जबरन वहां भेजा जा रहा है। हम शुरू से कह रहे हैं कि भाजपा का असली एजेंडा जेडीयू को खत्म करना है।”
तेजस्वी ने आगे कहा कि भले ही नीतीश कुमार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, लेकिन निर्णय उनके नहीं चलते। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर मौजूद 3-4 खास लोग, जो भाजपा के साथ मिले हुए हैं, वही सारे फैसले ले रहे हैं। तेजस्वी के अनुसार, भाजपा के साथ यह समझौता हो चुका है कि धीरे-धीरे जेडीयू को समाप्त कर दिया जाए।
ईंधन किल्लत और केंद्र की विफलता पर घेरा
संसद में प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार की नीतियों पर भी कड़ा प्रहार किया। देश में हो रही गैस और ईंधन की किल्लत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह सरकार की ‘नाकामी’ का नतीजा है।”सरकार अगर पहले से अलर्ट रहती तो आज यह नौबत नहीं आती। जब से यह सरकार आई है, आम नागरिकों और गरीबों को केवल मुसीबतें ही झेलनी पड़ रही हैं।
नोटबंदी और कोविड का दिया हवाला
तेजस्वी ने सरकार को घेरते हुए कहा कि चाहे नोटबंदी हो, कोविड महामारी का प्रबंधन हो या अब गैस की किल्लत—सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किल्लत हो रही है, तो सरकार के पास क्या वैकल्पिक व्यवस्था है जिससे लोगों को दिक्कत न हो? उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि आखिर नोटबंदी से क्या फायदा हुआ, सिवाय इसके कि जनता को लाइन में खड़ा होना पड़ा।
तेजस्वी यादव के इन बयानों ने बिहार की सियासत में ‘ऑल इज नॉट वेल’ (सब कुछ ठीक नहीं है) के संकेतों को फिर से हवा दे दी है। एक तरफ जहाँ वे जेडीयू के भीतर की कलह को उजागर कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं के मुद्दे पर केंद्र को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।

