काठमांडू। न्यूज स्टिच
नेपाल की राजनीति में वह भूचाल आ गया है जिसकी कल्पना खुद पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भी नहीं की होगी। सत्ता की कुर्सी खिसकते ही महज 24 घंटे के भीतर केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन पर प्रधानमंत्री रहते हुए सत्ता का दुरुपयोग करने और युवाओं की आवाज को बेरहमी से कुचलने के गंभीर आरोप लगे हैं। वहीं ओली की गिरफ्तारी के बाद उनकी पार्टी की ओर से विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। समर्थक सड़क पर उतर नये सरकार का विरोध कर रहे हैं।
भ्रष्टाचार और दोस्तों को फायदा पहुँचाने का आरोप
सूत्रों के अनुसार, ओली के खिलाफ सबसे बड़ा आरोप ‘क्रोनी कैपिटलिज्म’ का है। आरोप है कि प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठकर उन्होंने आम जनता के हितों को ताक पर रख दिया और सिर्फ अपने चंद अमीर दोस्तों की तिजोरियां भरने के लिए नीतियां बनाईं। जनता गरीबी और बेरोजगारी से जूझती रही, लेकिन सत्ता के गलियारों में केवल रसूखदारों की सुनवाई होती रही।

युवा आंदोलन को कुचलने की साजिश
जब देश का युवा भ्रष्टाचार और तानाशाही के खिलाफ सड़कों पर उतरा, तब केपी शर्मा ओली ने लोकतांत्रिक तरीके से बात करने के बजाय आंदोलन को कुचलने की साजिश रची। प्रदर्शनकारी युवाओं पर पुलिसिया कार्रवाई और दमनकारी नीतियों ने पूरे देश में आक्रोश भर दिया था। उस वक्त सत्ता के मद में चूर ओली को लगा था कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, लेकिन समय का पहिया घूमा और जवाबदेही तय होने लगी।
सत्ता बदली और शुरू हुआ ‘हिसाब’
नेपाल में जैसे ही निजाम बदला, पुराने भ्रष्टाचार की फाइलें खुलने लगीं। जांच एजेंसियों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री को हिरासत में ले लिया है। यह गिरफ्तारी उन सभी राजनेताओं के लिए एक कड़ा संदेश है जो खुद को संविधान और जनता से ऊपर समझने लगते हैं। नेपाल की सड़कों पर अब चर्चा है कि क्या यह सिर्फ एक गिरफ्तारी है या देश को लूटने वालों के खिलाफ एक बड़े क्लीनअप ऑपरेशन की शुरुआत?

