पटना। न्यूजस्टिच
पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के संकट और इसके वैश्विक आर्थिक दुष्प्रभावों को देखते हुए बिहार सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्री की उच्चस्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ठीक एक दिन बाद राज्य सरकार ने बिहार में क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप के गठन का बड़ा फैसला लिया है। यह समूह युद्ध की स्थिति में बिहार की अर्थव्यवस्था, आपूर्ति श्रृंखला और प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सुपर टीम तैयार
बिहार के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित इस उच्चस्तरीय समिति में राज्य के सबसे महत्वपूर्ण विभागों के प्रमुखों को शामिल किया गया है। इसमें विकास आयुक्त, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव, डीजीपी और कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा, परिवहन, नगर विकास व श्रम संसाधन विभाग के प्रधान सचिवों को सदस्य बनाया गया है। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग को इस पूरे अभियान का नोडल विभाग नियुक्त किया गया है।
क्या होगी इस ग्रुप की मुख्य जिम्मेदारी?
क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप का प्राथमिक उद्देश्य राज्य में आवश्यक वस्तुओं (पेट्रोल, डीजल, खाद्यान्न और दवाइयां) की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
सप्लाई चेन की निगरानी: युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर होने वाली आपूर्ति बाधाओं का असर बिहार पर न पड़े, इसकी निरंतर निगरानी की जाएगी।
प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा: पश्चिम एशिया में फंसे बिहार के हजारों प्रवासी श्रमिकों के हितों की रक्षा और जरूरत पड़ने पर उनकी सुरक्षित वापसी के लिए केंद्र के साथ समन्वय करना।
आपातकालीन योजना: जरूरत पड़ने पर अन्य महत्वपूर्ण विभागों को भी इस समूह में जोड़ा जा सकता है।
30 मार्च को बैठकों का महादौर
सीएमजी की सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी पहली बैठक 30 मार्च को बुलाई गई है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में शाम 4:00 बजे सचिवालय में बैठक होगी, जिसके ठीक बाद शाम 5:00 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी प्रमंडलीय आयुक्तों (Commissioners) और जिलाधिकारियों (DMs) को सख्त निर्देश जारी किए जाएंगे। इस दौरान राज्यभर में प्रभावी समन्वय और कालाबाजारी रोकने की रणनीति पर अंतिम मुहर लगेगी।

