बिहार में नीतीश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने मंगलवार को एक बड़ी कार्रवाई की है। इस बार रडार पर आए हैं सहरसा में तैनात जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (DRDA) के निदेशक वैभव कुमार और किशनगंज एसडीपीओ गौतम कुमार। आय से अधिक संपत्ति (DA Case) के पुख्ता इनपुट के बाद ईओयू की विशेष टीमों ने वैभव कुमार के सहरसा और मुजफ्फरपुर समेत कुल छह ठिकानों पर एक साथ धावा बोला। वहीं एसडीपीओ गौतम कुमार के तीन ठीकानों पर छापा पड़ा है। ईओयू की टीम ने डीएसपी गौतम कुमार के पूर्णिया शहर स्थित तीन प्रमुख ठिकानों को निशाने पर लिया है। हाउसिंग कॉलोनी स्थित आलीशान आवास पर टीम सुबह से ही कागजातों की बारीकी से जांच कर रही है।
अहले सुबह की दबिश से हड़कंप
मंगलवार की सुबह जब सहरसा का नया बाजार इलाका अभी जाग ही रहा था तभी ईओयू की गाड़ियों का काफिला वार्ड नंबर 11 स्थित सराही मोड़ के पास रुका। यहां डायरेक्टर वैभव कुमार एक निजी मकान में किराए पर रहते हैं। टीम के अचानक पहुंचने से मोहल्ले में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने घर में प्रवेश करते ही सभी कमरों को अपनी निगरानी में ले लिया और सुरक्षा के लिहाज से घर के अंदर और बाहर किसी भी व्यक्ति की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी।
किशनगंज के डीएसपी गौतम कुमार के घर ईओयू का छापा जारी

मुजफ्फरपुर से सहरसा तक बिछा जाल
सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई केवल सहरसा तक सीमित नहीं है। वैभव कुमार के मुजफ्फरपुर स्थित पैतृक आवास और उनके करीबियों से जुड़े कुल छह ठिकानों पर ईओयू की अलग-अलग टीमें एक साथ दस्तावेजों को खंगाल रही हैं। जांच का दायरा इतना विस्तृत है कि इसमें वैभव कुमार के सेवाकाल के दौरान किए गए निवेश, बेनामी संपत्तियों और बैंक ट्रांजेक्शन की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
जांच में क्या मिला?
छापेमारी के दौरान टीम को अब तक कई चौंकाने वाले सुराग मिले हैं। विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो
निवेश के दस्तावेज: भारी मात्रा में जमीन और फ्लैट्स में निवेश से जुड़े कागजात मिले हैं।
बैंक पासबुक और लॉकर: कई बैंकों की पासबुक और चेकबुक जब्त की गई हैं, जिनकी स्क्रूटनी जारी है।
अघोषित संपत्ति: शुरुआती जांच में उनकी वैध आय और वर्तमान जीवनशैली व संपत्तियों के बीच बड़ा अंतर (Disproportionate Assets) दिखाई दे रहा है।
प्रशासनिक महकमे में खलबली
DRDA जैसे महत्वपूर्ण विभाग के निदेशक स्तर के अधिकारी पर इस कार्रवाई ने जिले के अन्य भ्रष्ट अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। ग्रामीण विकास की योजनाओं में होने वाली धांधली और कमीशनखोरी को लेकर वैभव कुमार लंबे समय से जांच एजेंसी की रडार पर थे। ईओयू के अधिकारियों का कहना है कि यह सर्च ऑपरेशन न्यायालय से विधिवत वारंट लेने के बाद शुरू किया गया है।
अगला कदम क्या?
फिलहाल ईओयू की टीमें सभी ठिकानों पर जमी हुई हैं। बरामद नकदी और स्वर्ण आभूषणों का मिलान किया जा रहा है। संभावना जताई जा रही है कि देर शाम तक ईओयू मुख्यालय से आधिकारिक प्रेस नोट जारी किया जाएगा, जिसमें वैभव कुमार की ‘काली कमाई’ का कच्चा चिट्ठा सार्वजनिक किया जा सकता है।
सहरसा में तैनात जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (DRDA) के निदेशक वैभव कुमार के यहां जारी छापा


