बिहार पुलिस के एक डीएसपी की काली कमाई की दास्तां ने भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की रडार पर आए SDPO गौतम कुमार से सोमवार को पूछताछ शुरू हुई, जिसके बाद उनकी अकूत बेनामी संपत्तियों के ऐसे खुलासे हो रहे हैं जो किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं हैं। उन्हें आर्थिक अपराध इकाई ने आय से अधिक संपत्ति मामले में तलब किया था।
नौकरानी को गिफ्ट की थार
जांच एजेंसियों की मानें तो गौतम कुमार ने भ्रष्टाचार की कमाई को छिपाने के लिए अपने परिवार ही नहीं, बल्कि घर की नौकरानी और एक महिला मित्र (गर्लफ्रेंड) को भी मोहरा बनाया।
• हैरान करने वाली बात: पश्चिम बंगाल की रहने वाली नौकरानी, कथित तौर पर थार गाड़ी से काम करने आती थी। उसके नाम पर करोड़ों की प्रॉपर्टी निवेश की गई है।
• महिला मित्र का कनेक्शन: सूत्रों के अनुसार, डीएसपी ने अपनी महिला मित्र के नाम पर कई कीमती प्लॉट खरीदे हैं।
• विदेशी निवेश: ईओयू को सुराग मिले हैं कि यह भ्रष्टाचार का जाल केवल बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि नेपाल में बड़ा निवेश, गंगटोक (सिक्किम) में आलीशान होटल और सिलीगुड़ी के मिरिक में चाय बागान तक फैला हुआ है।
फोन कॉल के रिकॉर्ड ने खोली सांठगांठ की पोल
जांच के दौरान मोबाइल फोन के सीडीआर (CDR) से एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। एसडीपीओं गौतम कुमार और किशनगंज के थानेदार रजनीश कुमार के बीच दिनभर में 40 से 50 बार बातचीत होती थी। एक थानेदार और एसडीपीओ के बीच इतनी अधिक फ्रीक्वेंसी में बातचीत ने पुलिस महकमे में गहरी सांठगांठ की ओर इशारा किया है। अब थानेदार रजनीश कुमार भी ईडी और ईओयू की सीधी रडार पर आ गए हैं।
किशनगंज के पूर्व एसपी तक पहुँच सकती है जांच की आंच
30 मार्च को पटना, किशनगंज और पूर्णिया समेत 6 ठिकानों पर हुई छापेमारी के बाद अब इस मामले में ईडी (ED) की एंट्री हो चुकी है। माना जा रहा है कि जांच का दायरा बढ़ने के साथ किशनगंज के एक पूर्व एसपी और कई अन्य पुलिसकर्मियों पर भी गाज गिर सकती है।
फील्ड से हटाकर मुख्यालय किए गए अटैच
भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों और 20 बीघा जमीन के पुख्ता दस्तावेज मिलने के बाद पुलिस मुख्यालय ने सख्त रुख अपनाया है। आईजी (मुख्यालय) मनोज कुमार के आदेश पर गौतम कुमार को फील्ड पोस्टिंग से हटाकर पुलिस मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है।
ED जल्द ही जब्त कर सकती है बेनामी संपत्तियां
ईडी जल्द ही इन सभी बेनामी संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। यह मामला बिहार पुलिस के इतिहास में भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा और ‘हाई-प्रोफाइल’ सिंडिकेट साबित हो सकता है।

