मोतिहारी/पटना। न्यूजस्टिच
मोतिहारी में जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में पुलिस और मद्यनिषेध विभाग की जांच में एक बड़ा अंतरराज्यीय सिंडिकेट उजागर हुआ है। तफ्तीश में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि जिस स्प्रिट से जहरीली शराब तैयार की गई थी, उसे औद्योगिक उपयोग के नाम पर नोएडा से मंगाया गया था। इस खुलासे के बाद बिहार पुलिस मुख्यालय ने पूरे राज्य में अलर्ट जारी कर दिया है।
हाइड्रोलिक ऑयल के जार में जहर की सप्लाई
पुलिस की विशेष टीम ने छापेमारी के दौरान अब तक 26 लीटर की क्षमता वाले 50 जार बरामद किए हैं। अपराधियों ने जांच एजेंसियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया था। बरामद किए गए स्प्रिट के जारों के ऊपर सुपर पावर SW-68 हाइड्रालिक आयल लिखा हुआ था। ये बरामदगी मोतिहारी के पिपरा कोठी, तुरकौलिया और रघुनाथपुर थाना क्षेत्रों से हुई है। पुलिस का मानना है कि हाइड्रोलिक ऑयल के लेबल के कारण इसे सड़क मार्ग से लाने में आसानी हुई और किसी को शक नहीं हुआ।
पुलिस मुख्यालय (PHQ) का राज्यव्यापी अलर्ट
इस गंभीर मामले को देखते हुए बिहार पुलिस मुख्यालय ने राज्य के सभी जिलों के रेंज IG और DIG को पत्र लिखकर हाई अलर्ट पर रहने को कहा है। मुख्यालय ने आशंका जताई है कि ऐसे जार में अवैध स्प्रिट की आपूर्ति मोतिहारी के अलावा अन्य जिलों में भी हो रही है। सभी जिलों को आसूचना संकलन करने और थानों के साथ-साथ चौकीदारों और दफादारों को जमीन स्तर पर सतर्क करने का निर्देश दिया गया है। रेल IG को GRP के माध्यम से ट्रेनों में विशेष तलाशी अभियान चलाने को कहा गया है। साथ ही, सभी जिलों में ट्रांसपोर्ट एजेंसियों के गोदामों की भी जांच की जाएगी।
ADG ने जारी की विशेष एडवाइजरी
मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो के ADG अमित कुमार जैन ने इस मामले के गहन अनुसंधान के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। आदेश दिया गया है कि कहीं भी संदिग्ध जार बरामद होते हैं, तो उसकी तत्काल रासायनिक जांच कराई जाए।
अभियुक्तों पर कसता कानूनी शिकंजा
अब तक की पुलिस जांच में स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला के मुख्य सूत्रधार राजा कुमार और कन्हैया राय का नाम सामने आया है। गिरफ्तार राजा कुमार ने स्वीकार किया है कि उसने कन्हैया राय के साथ मिलकर नोएडा से यह खेप मंगवाई थी। इसके अलावा, आत्मसमर्पण करने वाले अभियुक्त सुनील साह की भूमिका भी संदिग्ध मिली है। पुलिस अब इस गिरोह के आर्थिक और तकनीकी नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुटी है। अभियुक्तों के मोबाइल नंबरों का तकनीकी विश्लेषण (CDR) कर उनके पिछले एक साल का लोकेशन और मूवमेंट चार्ट तैयार किया जा रहा है। अपराधियों के बैंक खातों के पिछले एक साल के लेन-देन की डिटेल निकाली जा रही है ताकि फंडिंग के स्रोत का पता चल सके। इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि पुलिस अब केवल शराब विक्रेताओं तक ही नहीं, बल्कि इस ‘जहर’ के मुख्य सप्लायरों और सफेदपोश मददगारों तक पहुंचने की तैयारी में है।

