Satyam Kumar youngest IITian from Bihar

Youngest IITian Satyam Kumar: 12 की उम्र में IIT और 24 में PhD! बिहार के सत्यम कुमार की अद्भुत कहानी, भोजपुर से पहुंचे एप्पल

भोजपुर। न्यूजस्टिच
सफलता के लिए अक्सर कहा जाता है कि सही उम्र का इंतजार करना चाहिए, लेकिन बिहार के लाल सत्यम कुमार ने इस परिभाषा को ही बदल दिया। महज 12 साल की उम्र में जब बच्चे सातवीं या आठवीं कक्षा की पढ़ाई में उलझे होते हैं। सत्यम ने देश की सबसे कठिन परीक्षा IIT-JEE क्रैक कर दुनिया को चौंका दिया था। आज वही सत्यम अमेरिका के Texas Instruments में बतौर मशीन लर्निंग सिस्टम रिसर्च इंजीनियर अपनी मेधा का लोहा मनवा रहे हैं।

साधारण परिवेश, असाधारण प्रतिभा
20 जुलाई 1999 को बखोरापुर (भोजपुर) के एक किसान परिवार में जन्मे सत्यम की शुरुआती परवरिश बेहद सीमित संसाधनों में हुई। लेकिन उनके पिता सिद्धनाथ सिंह ने उनके भीतर छिपी प्रतिभा को जल्दी पहचान लिया। सत्यम के लिए गणित और विज्ञान के जटिल सवाल किसी खेल की तरह थे।

सत्यम का मिशन IIT और रिकॉर्ड तोड़ सफलता
सत्यम की कहानी में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट 2012 में आया, जब उन्होंने पहली बार IIT-JEE दी। पहला प्रयास में AIR 8137 रैंक लाई थी। उस में उनकी महज 12 थी। दुनिया हैरान थी पर सत्यम संतुष्ट नहीं थे। इसके बाद सत्यम ने दूसरा प्रयास किया। उसमें AIR 679 रैंक लाए। उस में उनकी उम्र 13 वर्ष थी। इस रैंक के साथ वह भारत के सबसे कम उम्र के IITian बन गए। IIT कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में BTech-MTech डुअल डिग्री के दौरान सत्यम ने केवल किताबी ज्ञान पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि रोबोटिक्स और इंटेलिजेंट सिस्टम्स में अपनी धाक जमाई। फ्रांस में Charpak Scholarship के तहत रिसर्च इंटर्नशिप ने उनके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता के द्वार खोल दिए।

अमेरिका में रिसर्च और Apple के साथ काम
2019 में सत्यम अमेरिका चले गए, जहाँ उन्होंने The University of Texas at Austin से PhD शुरू की। उनका रिसर्च क्षेत्र भविष्य की तकनीक Brain Computer Interface (BCI) पर केंद्रित था। यह एक ऐसी तकनीक है जो मानव मस्तिष्क के सिग्नल्स को मशीनी कमांड में बदल देती है। अपनी पीएचडी के दौरान उन्होंने दुनिया की दिग्गज कंपनी Apple में मशीन लर्निंग इंटर्न के रूप में भी काम किया। सितंबर 2024 में, महज 24 साल की उम्र में अपनी थीसिस डिफेंड कर उन्होंने डॉक्टर की उपाधि प्राप्त की।

प्रेरणा का दूसरा नाम: सत्यम
सत्यम की यह यात्रा बताती है कि प्रतिभा किसी गांव या शहर की मोहताज नहीं होती। बिहार के एक छोटे से गांव से निकलकर, ग्लोबल टेक जाइंट्स के साथ काम करना और मशीन लर्निंग जैसे जटिल विषयों में विशेषज्ञता हासिल करना लाखों भारतीय युवाओं के लिए एक मिसाल है। सत्यम कुमार की कहानी सिद्ध करती है कि यदि इरादे फौलादी हों और दिशा सही, तो सफलता की उड़ान के लिए पूरा आसमान भी कम पड़ जाता है।

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