गया। न्यूजस्टिच
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अक्सर अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं। लेकिन इस बार उनके बच्चे पैदा करने वाले फार्मूले पर बिहार के दिग्गज नेता और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने ऐसी दलील दी है कि सुनने वाले भी दंग रह गए। गया जी पहुंचे मांझी ने जनसंख्या और बच्चों को लेकर एक नई फिलॉसफी पेश कर दी है।
क्या था बाबा बागेश्वर का बयान?
दरअसल नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने समर्थकों से कहा था कि कम से कम चार बच्चे पैदा करो…दो अपने पास रखो, एक राम सेवा में लगाओ और एक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को समर्पित कर दो। बाबा का यह बयान सीधे तौर पर संघ और हिंदुत्व की मजबूती से जोड़कर देखा जा रहा था, जिस पर अब जीतन राम मांझी की प्रतिक्रिया आई है।
मांझी की अजब-गजब दलील, बच्चा सिर्फ पेट नहीं होता!
जब गया में पत्रकारों ने केंद्रीय मंत्री से बाबा के इस बयान पर राय मांगी, तो मांझी ने बेहद दार्शनिक अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि बाबा क्या बोलते हैं, वो हम नहीं जानते, लेकिन आदमी को बच्चा पैदा करने या जनसंख्या बढ़ाने में संकीर्णता (छोटापन) नहीं दिखानी चाहिए। मांझी ने तर्क देते हुए कहा कि दुनिया अक्सर यह सोचती है कि ज्यादा बच्चे होंगे तो उन्हें खिलाएंगे क्या? लेकिन सत्य यह है कि कोई भी बच्चा सिर्फ पेट लेकर पैदा नहीं होता, बल्कि वह अपने साथ दो हाथ और एक मस्तिष्क (दिमाग) लेकर भी आता है। कौन बच्चा आगे चलकर कितना बड़ा आदमी बन जाएगा और क्या कर दिखाएगा, यह कोई नहीं कह सकता।
जगतगुरु भारत और 60 करोड़ देवताओं का जिक्र
मांझी ने जनसंख्या नियंत्रण की बहस को इतिहास से जोड़ते हुए एक दिलचस्प मिसाल पेश की। उन्होंने कहा कि आज भारत की जनसंख्या 140 करोड़ है, लेकिन एक दौर वह भी था जब हमारे यहाँ 60 करोड़ देवता माने जाते थे और तब भारत ‘जगतगुरु’ कहलाता था। उस समय जनसंख्या पर ऐसी कोई रोक-टोक नहीं थी। मांझी का मानना है कि अगर देश में रोजगार के अवसर पैदा किए जाएं और समाज को ईमानदारी से चलाया जाए, तो सबका पालन-पोषण करना कोई बड़ी समस्या नहीं है।
सियासी मायने: संघ की मजबूती या आबादी का गणित?
धीरेंद्र शास्त्री का बयान जहाँ संघ और भाजपा के कोर एजेंडे को मजबूती देने वाला माना जा रहा है। वहीं जीतन राम मांझी ने इसे ईमानदार शासन और रोजगार से जोड़कर एक नया रुख दे दिया है। मांझी ने स्पष्ट किया कि जनसंख्या बोझ नहीं है, बशर्ते उनके हाथों को काम और दिमाग को सही दिशा मिले।

