बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सुशासन और कानून के शासन को लेकर एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी चर्चा पूरे राज्य में हो रही है। अपने पैतृक जिले मुंगेर के तारापुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘न्याय के साथ विकास’ और ‘कानून का राज’ उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने घोषणा की कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर बनाया गया कोई भी ढांचा, चाहे वह किसी का भी हो, उसे हर हाल में ध्वस्त किया जाएगा।
खुद के घर से शुरुआत: अतिक्रमण पर मिसाल
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान सार्वजनिक मंच से एक बेहद चौंकाने वाली लेकिन प्रेरणादायक जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि उन्हें सूचना मिली है कि प्रशासन द्वारा तारापुर स्थित उनके स्वयं के घर की सीढ़ियां तोड़ी जा रही हैं, क्योंकि वे सरकारी जमीन पर बनी थीं। मुख्यमंत्री ने इस कार्रवाई का पूर्ण समर्थन करते हुए कहा, “सरकारी जमीन को हर हाल में मुक्त कराया जाएगा। नियम सबके लिए बराबर हैं, चाहे वह आम आदमी हो या मुख्यमंत्री।”
प्रशासनिक सुधार के बड़े फैसले
भ्रष्टाचार और कार्यशैली में ढिलाई को खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री ने तीन बड़े प्रशासनिक सुधारों की घोषणा की है:
- सीधी निगरानी (CMO Monitoring): अब ब्लॉक, अंचल और थानों की कार्यप्रणाली की निगरानी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से की जाएगी। इससे बिचौलियों और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।
- सहयोग कार्यक्रम (पंचायत कैंप): जनता को अपनी समस्याओं के लिए जिला मुख्यालय न जाना पड़े, इसके लिए प्रत्येक माह दो दिन पंचायतों में विशेष ‘सहयोग’ कैंप लगाए जाएंगे।
- फाइल रोकने पर कार्रवाई: मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी है कि यदि किसी फाइल को बिना किसी ठोस कारण के एक माह से अधिक समय तक लंबित रखा गया, तो संबंधित अधिकारी पर तत्काल कठोर कार्रवाई की जाएगी।

