जनसंघ से भाजपा तक के सफर में यह पहली बार है जब बिहार में भारतीय जनता दल का सीएम बना और उसके कैबिनेट का विस्तार हुआ है। दरअसल, बिहार की राजनीति में 7 मार्च का दिन भाजपा के अध्याय का सुनाहरा दिन रहा। जब पहली बार भाजपा के मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया और मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। गुरुवार को पटना के गांधी मैदान में आयोजित मंत्रिमंडल विस्तार और शपथ ग्रहण कार्यक्रम में हिस्सा लेने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह 11:30 बजे पटना पहुंचे। उनसे पहले गृहमंत्री अमित साह यहां आ गए थे। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितीन नवीन और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी कार्यक्रम मंे हुस्सा लेने पटना पहुंचे हुए थे। इस नए विस्तार में भारतीय जनता पार्टी (BJP) कोटे से 15 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। वहीं जनता दल यूनाइटेड (JDU) के कोटे से 13 मंत्री बनाए गए हैं। जबकि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के कोटे से 2, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के कोटे से 1-1 मंत्रियों ने शपथ लिया है।
भाजपा: अनुभवी चेहरों और नए जोश का संगम
भाजपा ने अपने कोटे से 15 नामों को आगे बढ़ाया है, जिसमें विजय कुमार सिन्हा जैसे कद्दावर नेताओं के साथ-साथ दिलीप जायसवाल, राम कृपाल यादव और नीतीश मिश्रा जैसे अनुभवी चेहरों को शामिल किया गया है। पार्टी ने इस बार सामाजिक समीकरणों का विशेष ध्यान रखा है। मिथलेश तिवारी, केदार गुप्ता, रमा निषाद और प्रमोद चंद्रवंशी के जरिए पिछड़ों और अतिपिछड़ों को साधने की कोशिश की गई है। वहीं, लखिन्द्र पासवान और नंदकिशोर राम के माध्यम से दलित समाज को प्रतिनिधित्व दिया गया है। युवा चेहरे के तौर पर श्रेयसी सिंह और इं कुमार शैलेन्द्र का नाम शामिल होना यह दर्शाता है कि पार्टी भविष्य की राजनीति के लिए नई पीढ़ी को तैयार कर रही है। संजय टाइगर, रामचंद्र प्रसाद और अरुण शंकर प्रसाद जैसे संगठन से जुड़े नेताओं को भी मंत्रिमंडल में जगह देकर कार्यकर्ताओं को बड़ा संदेश दिया गया है।
जेडीयू: निरंतरता और सामाजिक न्याय पर भरोसा
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने 13 नामों की सूची के साथ अपने पुराने और वफादार सिपहसालारों पर भरोसा जताया है। श्रवण कुमार, अशोक चौधरी, लेसी सिंह और मदन सहनी जैसे कद्दावर मंत्रियों की वापसी तय है। अल्पसंख्यक चेहरे के रूप में जमा खां और दलित चेहरे के रूप में रत्नेश सदा को फिर से जिम्मेदारी दी जा रही है। महिलाओं और पिछड़ों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए शीला मंडल, श्वेता गुप्ता और निशांत कुमार जैसे नामों को शामिल किया गया है। सुनील कुमार, बुलो मंडल, भगवान सिंह कुशवाहा और दामोदर रावत के जरिए जेडीयू ने अपने “लव-कुश” समीकरण और अतिपिछड़ा वोट बैंक को मजबूत करने का प्रयास किया है।
सहयोगियों का सम्मान गठबंधन धर्म का पालन करते हुए चिराग पासवान की पार्टी LJP(R) से संजय पासवान और संजय सिंह को जगह दी गई है। वहीं जीतन राम मांझी की पार्टी HAM से संतोष सुमन का नाम तय है। उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी RLM से दीपक प्रकाश को भी मंत्रिमंडल में स्थान मिला है, जो एनडीए की एकजुटता को दर्शाता है।

