अररिया। न्यूजस्टिच
अररिया न्यायमंडल के अंतर्गत फारबिसगंज अनुमंडल में बनकर तैयार हुए अत्याधुनिक 10 कोर्ट रूम वाले न्यायालय भवन और फौजदारी न्यायालय (Criminal Court) के कार्यप्रारंभ में हो रहे अत्यधिक विलंब को लेकर स्थानीय वकीलों में भारी आक्रोश है. इस प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ बार एसोसिएशन और एडवोकेट एसोसिएशन, फारबिसगंज ने संयुक्त रूप से आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है. 18 जून 2026 से अनिश्चितकालीन कलमबंद संघर्ष कार्यक्रम यानी कार्य बहिष्कार का ऐलान कर दिया है. बार एसोसिएशन फॉरबिसंगज के अध्यक्ष राजेश चंद्र वर्मा ने बतलाया इसको लेकर स्मार पत्र भी भेजा गया है. वहीं स्थानीय विधायक मनोज विश्वास ने भी वकीलों के इस आंदोलन में पहुंचकर अपना समर्थन दिया है.
कब से की जा रही है मांग और क्या है पूरा मामला?
बार एसोसिएशन द्वारा साझा किए गए दस्तावेजों के अनुसार फारबिसगंज अनुमंडल के वादकारियों (न्यायार्थियों) और वकीलों को सस्ता और सुलभ न्याय दिलाने के उद्देश्य से इस नए कोर्ट भवन का निर्माण कराया गया था. 18 अप्रैल 2025 को इस संबंध में जिला अतिथि सदन, अररिया में जिला जज, वरिष्ठ न्यायिक पदाधिकारियों, डीएम और विभिन्न विभागों जैसे RCD, विद्युत विभाग आदि के कार्यपालक अभियंताओं की उपस्थिति में जिला स्तरीय निगरानी समिति (DLMC) की बैठक हुई थी. इस बैठक में सभी संबंधित मामलों का तुरंत निपटारा करने का निर्देश दिया गया था.
04 जून 2026 की समय-सीमा
निरीक्षण न्यायाधीश (Inspection Judge) द्वारा आश्वासन दिया गया था कि पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के सेवानिवृत्त होने की तिथि (04-06-2026) से पहले करोड़ों रुपये की लागत से बने इस भवन का रंग-रोगन और अन्य कार्य युद्धस्तर पर पूरा कर इसका उद्घाटन करा दिया जाएगा. बाद में सार्वजनिक रूप से आश्वासन दिया गया था कि 15 मई 2026 तक हर हाल में इस नए न्यायालय भवन में विधिवत कामकाज शुरू हो जाएगा, लेकिन यह समय-सीमा भी बीत चुकी है.
अब तक क्या हुई प्रोग्रेस और कहां फंसा है पेंच?
दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाला 10 कोर्ट रूम का नया भवन पूरी तरह बनकर तैयार है. अररिया जिला न्यायालय प्रशासन को यह परिसर बहुत पहले ही हैंडओवर भी कराया जा चुका है.
पेंच कहां फंसा है?
एसोसिएशन का कहना है कि भवन पूरी तरह तैयार होने के बावजूद केवल प्रशासनिक ढुलमुल नीति और आधिकारिक उद्घाटन की तारीख तय न हो पाने के कारण इस चालू नहीं किया जा रहा है. ज्ञापनों में नाराजगी जताते हुए कहा गया है कि जब पड़ोसी जिले सुपौल के बीरपुर अनुमंडल और निर्मली अनुमंडल में सिविल कोर्ट का उद्घाटन कर वहां सुलभ न्याय प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है, तो फारबिसगंज के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है?
वकीलों और आम जनता को कितनी होती है परेशानी?
नया भवन चालू न होने के कारण वर्तमान अदालती परिसर में वकीलों और आम जनता (न्यायार्थियों) को बेहद खराब और दमघोंटू माहौल में काम करना पड़ रहा है. वर्तमान में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है. जिसके कारण वादकारियों को न तो सस्ता न्याय मिल पा रहा है. न ही बैठने या अन्य जरूरी सुविधाएं मिल रही हैं. सुलभ न्याय की उम्मीद में आने वाली फारबिसगंज अनुमंडल की लगभग 15 से 20 लाख की आबादी इस प्रशासनिक लेत-लतीफी के कारण हर दिन परेशान हो रही है.
विरोध में फारबिसगंज के वकीलों का बड़ा ऐलान
बार एसोसिएशन और एडवोकेट एसोसिएशन की संयुक्त बैठक की. जिसकी अध्यक्षता 80 वर्षीय वरिष्ठ अधिवक्ता तिलकधारी यादव ने की. बैठक में सर्वसम्मति से निम्नलिखित चरणबद्ध आंदोलन का निर्णय लिया गया है. वकीलों ने अपने विरोध के पहले चरण के तहत 23 मई 2026 से ही बांह पर काला बिल्ला लगाकर न्यायिक कार्य करना शुरू कर दिया था. चूंकि प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो 18 जून 2026 (गुरुवार) से उभय संघ के सभी विद्वान अधिवक्ताओं ने खुद को न्यायिक कार्यों से पूरी तरह अलग रखने (कलमबंद संघर्ष) का फैसला किया है. वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि 30 जून 2026 तक उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो न्याय के हित में गांधीवादी तरीके से शांतिपूर्ण धरना, गेट मीटिंग, प्रदर्शन और भूख हड़ताल जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे.
विभिन्न स्तरों पर भेजा गया स्मार ज्ञापन
इस गंभीर समस्या के त्वरित समाधान के लिए बार एसोसिएशन फारबिसगंज के अध्यक्ष राजेश चन्द्र वर्मा, महासचिव सुरेश प्रसाद साह और गोपाल प्रसाद मंडल द्वारा बिहार सरकार के माननीय विधि मंत्री संजय सिंह टाइगर, मुख्यमंत्री सचिवालय (पटना), अररिया के सांसद प्रदीप कुमार सिंह और निरीक्षण न्यायाधीश को ‘स्मार ज्ञापन’ भेजा गया है. वकीलों ने मांग की है कि जनहित और न्यायहित को देखते हुए बिना किसी देरी के इस नवनिर्मित भवन में अदालती कामकाज तुरंत शुरू करवाया जाए.

