Katra Court action on Vaishno Devi 20 ton fake silver scam

पहले राम मंदिर, अब यहां 500 करोड़ का महाघोटाला! वैष्णो देवी में 20 टन चांदी निकली नकली, कोर्ट का बड़ा एक्शन

जम्मू। न्यूजस्टिच

देश के सबसे प्रतिष्ठित और पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक, श्री माता वैष्णो देवी धाम में श्रद्धालुओं की आस्था के साथ एक बड़े और हैरान करने वाले धोखे का सनसनीखेज मामला सामने आया है। माता के दरबार में चढ़ावे के रूप में अर्पित की गई करीब 20 टन (20,000 किलोग्राम) चांदी नकली पाई गई है। इस महाघोटाले पर अब न्यायिक डंडा चला है। कटरा की स्थानीय अदालत ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस को तुरंत तलब किया है और मामले की जांच (Investigation) से जुड़े सारे रिकॉर्ड और अब तक हुई कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट अदालत में पेश करने का सख्त निर्देश दिया है।

550 करोड़ की चांदी की असली कीमत सिर्फ 30 करोड़!
यह पूरा मामला तब खुला जब ‘श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड’ (SMVDSB) ने अपने खजाने में जमा करीब 20 टन चांदी को शुद्धिकरण और प्रसंस्करण (Processing) के लिए सरकारी टकसाल (Government Mint) भेजा। जब वहां इसकी वैज्ञानिक जांच हुई, तो अधिकारियों के होश उड़ गए। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, जो धातु शुद्ध चांदी समझकर तिजोरी में रखी गई थी, उसमें से अधिकांश हिस्सा नकली या बेहद मिलावटी था। इस चांदी की अनुमानित बाजार कीमत करीब 500 से 550 करोड़ रुपये होनी चाहिए थी, लेकिन लैब टेस्टिंग के बाद इसकी वास्तविक कीमत महज 30 करोड़ रुपये आंकी गई।

वजन: 20 टन (लगभग)

अनुमानित बाजार मूल्य (अगर शुद्ध होती): ₹500 – ₹550 करोड़

जांच के बाद वास्तविक मूल्य: ₹30 करोड़ (लगभग)

अंतर/घोटाला: ₹500 करोड़ से अधिक

सिर्फ आर्थिक धोखाधड़ी नहीं, ‘पब्लिक हेल्थ’ पर भी बड़ा खतरा
इस मामले ने न केवल करोड़ों श्रद्धालुओं के भरोसे को तोड़ा है, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य संकट (Health Hazard) की तरफ भी इशारा किया है। जांच में सामने आया है कि चांदी की चमक बढ़ाने और उसे भारी बनाने के लिए उसमें कैडमियम (Cadmium) जैसी अत्यधिक जहरीली और कैंसरकारी (Carcinogenic) धातु की मिलावट की गई थी। अदालत अब इस एंगल पर भी गौर कर रही है कि कटरा और आसपास के इलाकों में कौन से ऐसे दुकानदार या सिंडिकेट सक्रिय हैं, जो श्रद्धालुओं को चांदी के नाम पर यह जानलेवा मिलावटी धातु बेच रहे थे।

देश के अन्य बड़े मंदिरों में भी आ चुके हैं ऐसे मामले
वैष्णो देवी का यह मामला कोई पहला नहीं है। भारत के कई अन्य अमीर और ऐतिहासिक मंदिरों में भी सोने-चांदी के चढ़ावे और आभूषणों में हेरफेर या चोरी के बड़े मामले सामने आ चुके हैं, जिन्होंने देश को झकझोर दिया था:

1. तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर (आंध्र प्रदेश) – गायब सोना और मिलावट के आरोप

दुनिया के सबसे अमीर मंदिरों में शुमार तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) भी विवादों से अछूता नहीं रहा है। कुछ साल पहले मंदिर के पूर्व मुख्य पुजारी ने आरोप लगाया था कि मंदिर के गुप्त तहखानों से प्राचीन सोने के आभूषण और कीमती पत्थर गायब हो रहे हैं। इसके अलावा, भक्तों द्वारा चढ़ाए जाने वाले सोने की शुद्धता को लेकर भी कई बार सवाल उठे, जिसके बाद TTD ने अपनी पूरी ऑडिट व्यवस्था को डिजिटल और बेहद कड़ा कर दिया।

2. श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर (केरल) – ‘सैकड़ों करोड़ का सोना गायब’

तिरुवनंतपुरम के इस ऐतिहासिक मंदिर के शाही तहखानों (Vaults) के खुलने के बाद जब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में देश के पूर्व नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) विनोद राय ने ऑडिट किया, तो एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई। रिपोर्ट में कहा गया था कि मंदिर के रिकॉर्ड से लगभग 769 करोड़ रुपये मूल्य का सोना (लगभग 263 किलोग्राम) रहस्यमय तरीके से गायब था। कई सोने के बर्तनों की जगह नकली या कम वजन के बर्तन मिलने की बात भी सामने आई थी।

3. पुरी जगन्नाथ मंदिर (ओडिशा) – रत्न भंडार की चाबियां और आभूषण विवाद

ओडिशा के पुरी जगन्नाथ मंदिर का ‘रत्न भंडार’ हमेशा से चर्चा में रहा है। साल 2018 में जब इसके आंतरिक कक्ष को खोलने की कोशिश हुई, तो पता चला कि उसकी चाबियां ही गायब हैं, जिसने पूरे देश में राजनीतिक और सामाजिक तूल पकड़ लिया था। इसके बाद मंदिर के आभूषणों की शुद्धता और उनकी सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में याचिकाएं दायर की गईं।

आगे की राह और कोर्ट का रुख
कटरा कोर्ट के कड़े रुख के बाद अब स्थानीय प्रशासन और पुलिस बैकफुट पर है। कोर्ट ने साफ किया है कि इस मामले की तह तक जाना जरूरी है ताकि यह पता चल सके कि कटरा के स्थानीय बाजारों में श्रद्धालुओं को नकली धातु बेचने का यह काला कारोबार कब से चल रहा था। आने वाले 6 महीनों के भीतर पुलिस को इस सिंडिकेट का भंडाफोड़ करना होगा, अन्यथा श्राइन बोर्ड की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवालिया निशान खड़े रहेंगे।