झारखंड में jpsc धांधली मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनावई है।

JPSC धांधली मामला : सुप्रीम कोर्ट ने मामले की CBI जांच की याचिका पर झारखंड सरकार को जारी किया नोटिस

नई दिल्ली। न्यूजस्टिच

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ी और अनियमिताओं को लेकर सड़कों पर उतरे हजारों युवाओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। देश की सर्वोच्च अदालत ने इस पूरे विवाद का कड़ा संज्ञान लेते हुए मामले में स्वतंत्र केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) जांच की मांग पर केंद्र व राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि इस केस की सुनवाई के लिए जल्द से जल्द अगली तारीख निर्धारित की जाए।

न्यायालय परिसर में गूंजी सड़क के विरोध की आवाज

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने कोर्ट को बताया कि परीक्षा में हुई धांधली को लेकर झारखंड के लाखों युवा छात्र लगातार आंदोलन और प्रदर्शन कर रहे हैं। राज्य में बने असंतोष के माहौल का हवाला देते हुए अधिवक्ता ने मांग रखी कि इस पूरे तंत्र की निष्पक्षता बहाल करने के लिए या तो सीबीआई से जांच कराई जाए या फिर सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अगुवाई में समिति गठित की जाए।

“यह महज जांच नहीं, फॉरेंसिक इन्वेस्टिगेशन का मामला है” – CJI

पूर्व जज से जांच कराने के सुझाव पर CJI सूर्यकांत ने कानूनी प्रक्रिया और तकनीकी जटिलताओं का उल्लेख करते हुए स्पष्ट रुख अपनाया। CJI ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पूर्व जज से ऐसी जांच कराना संभव नहीं है क्योंकि यह सिर्फ एक प्रशासनिक ‘इंक्वायरी’ का विषय नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर ‘इन्वेस्टिगेशन’ (आपराधिक जांच) का मामला है।

अदालत ने माना कि इस स्तर की गड़बड़ी में फॉरेंसिक जांच सहित कई तकनीकी और गहन पहलुओं की पड़ताल आवश्यक होती है, जिसे कोई विशेषज्ञ जांच एजेंसी ही बेहतर ढंग से अंजाम दे सकती है। CJI ने लोक सेवा आयोगों द्वारा आयोजित होने वाली न्यायिक सेवा परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर भी चिंता जताई।

राज्य सरकार ने स्वीकार किया नोटिस, जल्द होगी अगली सुनवाई

याचिकाकर्ता की ओर से पेश दलीलों को सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश ने “नोटिस जारी करने” के आदेश दिए। सुनवाई के दौरान मौजूद झारखंड सरकार के वकील ने शीर्ष अदालत से नोटिस स्वीकार किया। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद अब यह तय माना जा रहा है कि JPSC परीक्षा प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर आने वाले दिनों में कड़े कदम देखने को मिल सकते हैं।