डेस्क। न्यूजस्टिच
मध्य पूर्व में ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध के कारण संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में इस वक्त हाहाकार मचा हुआ है। सुरक्षा कारणों से देश के सभी प्रमुख हवाई अड्डे (Airports) अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं, जिसके चलते दुनिया भर के लाखों यात्री वहां फंस गए हैं। ऐसे संकट काल में अबू धाबी होटल एसोसिएशन ने एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला लिया है, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है।
जब तक हालात सामान्य नहीं, तब तक सब ‘निशुल्क’
अबू धाबी होटल एसोसिएशन ने घोषणा की है कि हवाई अड्डे बंद होने के कारण जो भी विदेशी यात्री या पर्यटक शहर में फंसे हुए हैं, उन्हें होटलों में रहने के लिए एक भी रुपया खर्च करने की जरूरत नहीं है। एसोसिएशन के मुताबिक, जब तक युद्ध के हालात सामान्य नहीं हो जाते और उड़ानें फिर से शुरू नहीं हो जातीं, तब तक सभी फंसे हुए लोगों को होटलों में निशुल्क (Free) रहने और खाने की सुविधा दी जाएगी।

मुनाफाखोरी नहीं, सेवा को दिया महत्व
अक्सर देखा जाता है कि संकट के समय कई जगहों पर आपदा को अवसर में बदल दिया जाता है। लोग मजबूर यात्रियों से सामान्य से दस गुना ज्यादा किराया वसूलने लगते हैं, लेकिन अबू धाबी ने इसके ठीक उलट मिसाल पेश की है। यह फैसला उस समय आया है जब लाखों लोग घर वापसी की उम्मीद में होटलों और सार्वजनिक जगहों पर शरण लिए हुए हैं। मुस्लिम बहुल देश होने के नाते, अबू धाबी के इस कदम को ‘इस्लामिक मूल्यों’ और ‘अतिथि सत्कार’ (Guest Hospitality) की गहरी भावना से जोड़कर देखा जा रहा है।
दुनिया के लिए एक बड़ा सबक
यह कदम उन लोगों के लिए एक बड़ा तमाचा है जो मुश्किल वक्त में कीमतें बढ़ाकर अपनी जेबें भरने में जुट जाते हैं। सोशल मीडिया पर लोग इस फैसले की तुलना अन्य देशों की व्यवस्था से कर रहे हैं, जहाँ युद्ध या महामारी के दौरान लूट-खसोट मच जाती है। अबू धाबी सरकार और वहां के होटल मालिकों ने साबित कर दिया है कि मानवता किसी भी मुनाफे से ऊपर है। इस फैसले से न केवल फंसे हुए लाखों भारतीयों बल्कि दुनिया भर के यात्रियों को बड़ी राहत मिली है।

